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इस प्लान से दूर होगी गैस व तेल की किल्लत

Sun, 09 Feb 2014 09:59 AM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 09 Feb 2014 09:59 AM IST
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ongc plan 2030

लगातार बढ़ रही मांग के बीच तेल व गैस की निरंतरता बरकरार रखने के लिए ओएनजीसी ने ‘प्लान 2030’ तैयार किया है। इसके तहत कंपनी ने वर्ष 2030 उत्पादन क्षमता को सात गुना तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।

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दस हजार करोड़ रुपए का खर्च
शनिवार को ओएनजीसी तेल भवन में पत्रकारों से वार्ता करते हुए ओएनजीसी के निदेशक(अन्वेषण) एनके वर्मा ने बताया कि योजना के तहत हर साल तेल व गैस भंडारों की खोज पर दस हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। ओएनजीसी ने 3.5 बिलियन टन अन्वेषण का लक्ष्य तय किया है।
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उत्पादन बढ़ाने के लिए कंपनी विदेशों में भी विस्तार करेगी। कार्ययोजना के लिए अन्वेषण एवं विकास निदेशालय में ‘एक्सप्लोरेशन पोर्टफोलियो मैनेजमेंट बोर्ड’ का गठन किया गया है। ओएनजीसी के दो प्रोजेक्ट दक्षिणी सूडान और सीरिया में चल रहे हैं।
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लेकिन वहां हालात बिगड़ने पर ओएनजीसी ने कर्मचारियों को वापस बुला लिया है। हालांकि, इससे काफी नुकसान हो रहा है। इस मौके पर ई एंड डी चीफ आनंद साहू, केवीएमआईपीई के प्रमुख डा. डीके दास गुप्ता, जियोपिक हेड अनिल सूद और फ्रंटियर बेसिन मैनेजर डीएन सिंह मौजूद रहे।

उत्तराखंड में ब्लॉक का इंतजार
निदेशक (अन्वेषण) एनके वर्मा ने कहा कि प्रदेश के काठगोदाम व यूपी के मोहंड, सहारनपुर, पीलीभीत और काठगोदाम में ड्रिलिंग कर तेल व गैस की संभावनाएं तलाशी जा चुकी है, लेकिन कहीं सफलता नहीं मिली। प्रदेश के अन्य स्थानों में तेल व गैस की खोज के लिए उन्होंने केंद्र सरकार से ब्लॉक मिलने की आवश्यकता जताई।

तेल और गैस का विकल्प बनेगी शेल गैस
तेजी से बढ़ रही ऊर्जा खपत को देखते तेजी से विकल्पों की तलाश हो रही है। इसमें शेल गैस का नाम सबसे ऊपर है। इन दिनों कई देशों में इस गैस की खोज और प्रयोग पर जोरशोर से काम चल रहा है।

अब भारत में भी इस दिशा में बड़ा प्रोजेक्ट शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने ओएनजीसी को देश में ऐसे ब्लॉक चिह्नित करने का जिम्मा सौंपा है, जहां शेल गैस मिलनी की उम्मीद हो।

इसके बाद सरकार इन ब्लॉक की निविदा निकालकर शेल गैस का उत्पादन शुरू करने जा रही है। शेल गैस के सही उपयोग का तरीका भी खोजा जा रहा है। ओएनजीसी फिलहाल जम्मू में एक कुएं से शेल गैस निकालने के लिए प्रयासरत है।

यहां से निकलने वाली गैस अन्वेषण कार्य में प्रयोग होगी। ओएनजीसी के निदेशक अन्वेषण एनके वर्मा ने बताया कि शेल गैस की खोज का अभियान जल्द शुरू होने जा रहा है।

अमेरिका, चीन भी कर रहा काम
माना जाता है कि सबसे पहले शेल गैस अमेरिका के न्यूयॉर्क में 1821 में पाई गई थी। अमेरिका और चीन लगातार अन्वेषण कर इसे उपयोग में लाने की तरीके खोज रहे हैं।


अमेरिका यह मान चुका है कि ज्यादा से शेल गैस के प्रयोग से ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी आएगी। यह गैस पृथ्वी की शेल से निकलती है। जिस प्रकार तेल क्रूड ऑयल के तौर पर निकलता है, उसी प्रकार इसे भी क्रूड गैस के तौर पर माना जा रहा है।

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