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नदी विकराल हुई तो तबाह हो जाएगा धारचूला!

Mon, 16 Jun 2014 12:25 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़)
ब्यूरो / अमर उजाला, धारचूला (पिथौरागढ़) Updated Mon, 16 Jun 2014 12:25 PM IST
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one year of uttarakhand disaster

ग्लेशियर पिघलने से फिर पहाड़ की नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है।

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कई कस्बों में तबाही मचा सकती है नदी

इस बार भी पिछले साल की तरह बरसात में नदियां उफान पर आईं तो धारचूला नगर के साथ ही मदकोट, बलुवाकोट, कालिका, छारछुम, झूलाघाट, जौलजीबी आदि कस्बों में तबाही मच सकती है।

तमाम सरकारी कार्यालय भी खतरे की जद में हैं। सरकार की तैयारी इतनी सुस्त है कि खतरे की जद में आए कस्बों, गांवों को बचाने के लिए बाढ़ सुरक्षा के काम हाल ही में शुरू हुए हैं।
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खुद सिंचाई विभाग के अधिकारी देर से धन मिलने को काम में देरी का कारण बता रहे हैं। जिले में 104 करोड़ की लागत से 7.3 किलोमीटर हिस्से में तटबंध बनाए जाने हैं।
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आपदाग्रस्त क्षेत्रों में 11 योजनाओं के तहत 19 जगहों पर बाढ़ सुरक्षा के काम किए जाने हैं, जिनमें से 14 स्थानों में ही काम शुरू हो पाया है। वह भी फाउंडेशन लेबल तक नहीं पहुंचा है।

जुलाई से बढ़ेगी बारिश
धारचूला का एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय, ब्लाक कार्यालय, पशु चिकित्सालय के साथ ही गोठी में एसएसबी का कैंप, निगालपानी में एनएचपीसी के भवन आज भी गंभीर खतरे में हैं।

नदी में पानी बढ़ा तो खतरे से घिरी सरकारी, निजी संपत्ति को बचाना संभव नहीं होगा। गोठी के पूर्व प्रधान दान सिंह बोनाल कहते है कि जुलाई से बारिश बढ़ेगी।

ऐसी स्थिति में खतरे में आए कस्बों, गांवों को बचाना मुश्किल होगा।

गोठी में प्रभावित बना रहे मकान
2013 की आपदा के बेघरों में अधिकांश परिवार धारचूला, मुनस्यारी में किराये के मकानों में रह रहे हैं। कुछ प्रभावितों के लिए लोगों के लिए सरकार ने टिनशेड बनाए हैं।

धारचूला के गोठी में 40 आपदा प्रभावित जमीन का प्रबंध कर सरकारी इमदाद से मकान बना रहे हैं। सरकार ने पांच लाख रुपए प्रति परिवार मदद दी है। धारचूला में 6 घर बन रहे हैं।  

कुछ ही दिन का मेहमान जौलजीबी का पुल
17 जून 2013 के जलप्रलय में भारत-नेपाल सीमा के जौलजीबी में दोनों देशों को जोड़ने के लिए महाकाली में बनाया गया झूलापुल बह गया था, उसका पुनर्निर्माण आज तक नहीं हुआ।

इस पुल को बनाने की जिम्मेदारी नेपाल सरकार की है। 14 नवंबर से होने वाले जौलजीबी के ऐतिहासिक मेले को देखते हुए काली में लकड़ी का अस्थायी पुल बनाया गया, जलस्तर बढ़ने के कारण वह बहने की कगार पर है।


इस स्थान पर दोनों स्थानों की पुलिस, कस्टम विभाग के कर्मी तैनात रहते हैं। अस्थायी पुल कुछ ही दिन का मेहमान है। सरकारी चेतना कब जागती है, इसका लोगों को इंतजार है।

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