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जेपी जोशी प्रकरणः ब्लैकमेलिंग में दिल्ली का पत्रकार अरेस्ट
अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 22 Dec 2013 11:12 AM IST
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जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में ब्लैकमेलिंग के आरोपी दिल्ली के एक टीवी पत्रकार को पुलिस ने गाजियाबाद से गिरफ्तार कर लिया है। जबकि दो पत्रकार अब भी फरार हैं।
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पुलिस इस मामले में कुछ और कथित पत्रकारों की भूमिका की भी जांच कर रही है। अश्लील सीडी बनाकर निलंबित अपर सचिव जेपी जोशी को ब्लैकमेल करने के मामले में एक चैनल के हेड और उसके दो साथी पत्रकारों की संलिप्तता भी सामने आई थी।
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दिल्ली में कार्यरत इन तीनों की तलाश में पुलिस दिल्ली और एनसीआर में दो दिन से दबिश दे रही थी। सूत्रों के अनुसार, शनिवार रात पुलिस ने एक आरोपी संजय बनर्जी को वैशाली (गाजियाबाद) के एक मॉल से गिरफ्तार कर लिया।
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पुलिस टीम रविवार को संजय बनर्जी को लेकर दून पहुंचेगी और उसे ड्यूटी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जा सकता है। इससे पहले पुलिस ने शनिवार को दिल्ली के लक्ष्मीनगर, करोलबाग, दरियागंज के अलावा एनसीआर में नोएडा और गाजियाबाद में कई जगह छापे मारे। आरोपी पत्रकारों के करीबियों से भी पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तारी से बचने के लिए इन टीवी पत्रकारों ने राजनीतिक पहुंच का सहारा भी लिया। बात नहीं बनने पर वे अरेस्टिंग स्टे के लिए नैनीताल हाईकोर्ट जाने की तैयारी में थे।
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इस सूचना पर बाकी दो आरोपी टीवी पत्रकारों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस और एसटीएफ की दूसरी टीमों ने नैनीताल में भी जाल बिछा दिया है।
नौ लोगों के नाम हैं इस पत्र में
जेपी जोशी यौन शोषण प्रकरण में युवती ने जिन लोगों से खुद की जान का खतरा बताते हुए शपथ पत्र दिया है, उसमें इक्का दुक्का नहीं बल्कि नौ लोगों के नाम शामिल बताए गए हैं।
सूत्रों की माने तो इसमें अभिषेक सिन्हा का नाम नहीं है। युवती ने खुद को सफेदपोश एवं कुछ अन्य लोगों से खतरा बताया है।
नीरज को नहीं मिली जमानत
यौन शोषण प्रकरण में निलंबित अपर सचिव जेपी जोशी को ब्लैकमेल करने के आरोपी नीरज चौहान की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।
अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि राजनीतिक विरोधियों ने नीरज के खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया है। जेपी जोशी ने जिन तीन मोबाइल नंबरों का अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया है इनमें दो मोबाइल पीड़िता के हैं।
जबकि एक मोबाइल सोहेब निवासी सहारनपुर का है। नीरज ने अपने मोबाइल से किसी को कोई धमकी नहीं दी। बचाव पक्ष ने कहा कि मामले में जेपी जोशी और पीड़िता की ओर से दर्ज मुकदमों की जांच एक ही पुलिस अधिकारी ममता बोहरा कर रही हैं।
यह विधि प्रावधानों के विरुद्ध है। पुलिस ने टीवी चैनल के मालिक से कोई पूछताछ नहीं की न की अब तक कोई बरामदगी की है। अभियोजन पक्ष ने इसका विरोध किया। जिस पर अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।