फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   one man uttarakhand government.

उत्तराखंड की वन 'मैन' सरकार, नहीं दिख रहे हैं मंत्री

Thu, 31 Dec 2015 02:12 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 31 Dec 2015 02:12 PM IST
विज्ञापन
one man uttarakhand government.

उत्तराखंड का मुख्यमंत्री कौन? हरीश रावत, समाज कल्याण मंत्री? हरीश रावत, शिक्षामंत्री? हरीश रावत...यानी कोई भी विभाग हो या विषय, जवाब में बस एक ही चेहरा हरीश रावत नजर आ रहा है।

विज्ञापन


कुछ मंत्री इसे कार्यक्षेत्र में मुख्यमंत्री की दखलअंदाजी मान रहे हैं पर औपचारिक रूप से स्वीकार करने को कोई नहीं तैयार। राजनीतिक गलियारा हो या प्रशासनिक हलका, पिछले कुछ समय से बस एक ही चर्चा है कि यहां तो पूरी तरह वन मैन शो हो गया है।
विज्ञापन


कुछ लोग इसे कांग्रेस की राजनीति में रावत के बड़े कद का परिणाम बता रहे हैं तो कुछ का कहना है कि यह छोटे प्रदेश की राजनीति का मामला है। इसे मुख्यमंत्री की खूबी माने या मंत्रियों की कमजोरी, यह बड़े अनुसंधान का विषय है। हां, वित्त मंत्री इंदिरा ह्दयेश कभी-कभी मुंह खोलती हैं, मगर ज्यादातर मौकों पर वे मंत्रिमंडलीय सहयोगी से ज्यादा विपक्षी नजर आने लगती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


अनायास ही यह सवाल नहीं उठ रहे हैं। दरअसल सीएम और उनके मंत्रीमंडलीय सहयोगियों का कामकाज ही कुछ ऐसा है। सबसे ताजी बानगी, मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी के विभाग समाज कल्याण से जुड़े नारी निकेतन की है। प्रदेश की फिलहाल सबसे चर्चित घटना में किसी ने नेगी के कोई बोल सुने क्या?

विभागीय निर्देश हो या समीक्षा बैठक या मीडिया के कड़वे सवालों के जवाब में बस एक चेहरा सामने आ रहा है, वह हैं मुख्यमंत्री हरीश रावत। यह अकेली घटना नहीं है। जरा दिमाग पर जोर डालिए, छह-आठ महीने के भीतर का कोई प्रसंग आपको याद नहीं आएगा, जिसमें नेगी ने समाज कल्याण विभाग से जुड़े मुद्दे पर प्रभावी ढंग से कुछ बोला हो।
 
स्मार्ट सिटी के मसले पर शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार कब बोले, यह याद करने में लोगों को दिमाग पर जोर डालना पड़ेगा। पंवार एक-दो बैठकों तक ही खुद को सीमित किए रहे, मगर सीएम कब-कब, क्या-क्या बोले, क्या किया सबको पता होगा। पंचायतों को अधिकार देने के मसले पर पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह इतने मुखर नजर नहीं आ रहे हैं, जितना सीएम रावत।

बाढ़ नियंत्रण, पर्यटन जैसे महत्वपूर्ण महकमों पर रावत ही हावी दिखते हैं। यह मामला विभागीय स्तर पर समीक्षाओं में भी नजर आता है। विधानसभा क्षेत्रों से लेकर विभागों की समीक्षा में हरीश रावत सामने दिख रहे हैं। इन बैठकों में कुछ एक मौकों पर मंत्री होते हैं, पर अधिकतर बैठकों में इनकी उपस्थिति नहीं होती।

ऐसा नही है कि कहीं से कोई अलग सुर नजर नहीं आता। वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश कुछ एक मौकों पर मोरचा संभाले नजर आती है। पर, प्रदेश के आर्थिक मोरचे पर वित्त मंत्री से ज्यादा मुख्यमंत्री हरीश रावत अधिक सक्रिय दिखते हैं।

ऐसे भी कई मामले सामने आए हैं, जब मुख्यमंत्री ने मंत्री के आदेश को ही दरकिनार कर दिया। खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत को कई बार मंत्रियों के सक्रिय न होने के सवाल का सामना भी करना पड़ा है। हालांकि मुख्यमंत्री ऐसे सवालों को यह कहकर दरकिनार कर रहे हैं कि मंत्री अपना काम बखूबी कर रहे हैं।

निर्वाचन क्षेत्रों तक सीमित
- भले ही मंत्री इस मामले को हरीश रावत के दीर्घ राजनीतिक जीवन और अनुभव का सम्मान बता रहे हों पर हकीकत यह भी है कि मंत्रियों का फोकस अपने निर्वाचन क्षेत्रों पर अधिक है और विभागों पर कम।

विभाग के स्तर पर शायद ही मंत्रियों ने अपनी दीर्घकालिक योजनाओं का कोई खाका पेश किया हो। कुछ मंत्रियों के बारे में तो साफ माना जाता है कि वो अब अपने निर्वाचन क्षेत्र की सड़क, बिजली, पानी की समस्याओं को लेकर ज्यादा चिंतित हैं और महकमे का काम अधिकारी संभाल रहे हैं।

मंत्रियों से कांग्रेस पार्टी की भी है दूरी
मंत्रियों के व्यवहार को लेकर कांग्रेस को भी शिकायत है और मौके-बेमौके यह बात सामने आ भी जाती है। पार्टी से रिश्ते बनाए रखने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत तो यह कह भी देते हैं कि पार्टी का आदेश होता है तो मैं पहुंच ही जाता हूं, पर मंत्रियों की उपस्थिति कांग्रेस संगठन के कार्यक्रम में अधिकतर मौकों पर नहीं होती।

कांग्रेस संगठन के स्तर पर कुछ समय पहले ही यह व्यवस्था भी हुई थी कि पार्टी कार्यालय में मंत्री समय देंगे। वन मंत्री दिनेश अग्रवाल, पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह एक-दो बार दिखे भी पर इसके बाद यह सिलसिला ही टूट गया। कांग्रेस संगठन ने संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक करने की बात की तो मुख्यमंत्री हरीश रावत की संपत्ति का ब्यौरा ही अभी तक सामने आ पाया है।

हालांकि, मंत्रियों से सहयोग न मिलने की बात से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय इत्तेफाक नहीं रखते। किशोर के मुताबिक संगठन के कार्य में मंत्रियों से सहयोग मिल रहा है। यह अलग बात है कि अब चुनाव नजदीक आने के साथ ही मंत्री अपने निर्वाचन क्षेत्रों में भी व्यस्त हो रहे हैं।

मंत्रियों के लिए यह परेशान होने वाली बात नहीं है। मुख्यमंत्री वरिष्ठ हैं, अनुभवी हैं। उनके निर्देश का हम पालन करते हैं। इसे मंत्रियों के काम में दखल नहीं कह सकते।
- यशपाल आर्य, राजस्व मंत्री

यह स्वाभाविक प्रक्रिया है। मुख्यमंत्री हर बात को गंभीरता से लेते हैं, हर छोटी-बड़ी चीज की चिंता करते हैं। कुछ मीडिया का दृष्टिकोण भी है। सीएम और मैं जब एक कार्यक्रम होते हैं तो भले ही सीएम से कमजोर बात न कहूं पर कवरेज सीएम को अधिक मिलता है। आप हमें उतनी जगह ही कहां देते हो, वरना काम तो हम भी बराबर कर ही रहे हैं।
- सुरेंद्र सिंह नेगी, स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण मंत्री

मामला किसी के सम्मान या अपमान का नहीं है। जहां मंत्रियों की दृष्टि खत्म होती हैं, वहां से मुख्यमंत्री सोचना शुरू करते हैं। फिर काम तो मंत्रिमंडल से चलता है और मंत्रिमंडल सामूहिक जिम्मेदारी है।
- दिनेश धनै, पर्यटन मंत्री

- नरेंद्र नगर डीएफओ विनय भार्गव को विभागीय मंत्री दिनेश अग्रवाल ने दोषी पाया। दंडादेश जारी करने की संस्तुति की गई, लेकिन सीएम ने भार्गव को माफ कर दिया।

- शिक्षा निदेशक सीएस ग्वाल को रिटायर होने से पहले एक मामले में दोषी पाया गया। मंत्री ने चार्जशीट के आदेश दिए, सीएम ने रोक दी। मामला उछला तो हुई चार्जशीट जारी।

- रानीखेत के पास नैनीसार में जिंदल ग्रुप को दी गई जमीन के मामले में राजस्व मंत्री यशपाल आर्य हुए बाईपास। विभागीय मंत्री की जानकारी के बिना लीज के आदेश जारी ।

- शिक्षा मंत्री ने माध्यमिक शिक्षा के 96 व प्राथमिक के 159 शिक्षकों के तबादले कर दिए। खूब हो हल्ला हुआ और अंत में सीएम ने फाइल मंगाकर दोनों तबादला सूची निरस्त कर दी।

- राज्य के 175 स्कूलों को अनुदान की सूची में शामिल किया गया। सीएम ने करीब 50 स्कूलों को अनुदान देने के आवेदनों पर सीधे आदेश कर दिए, जो शासन के गले में अटके हुए हैं।
 
- राज्य सैनिक कल्याण परिषद में विभागीय मंत्री हरक सिंह रावत नहीं चाहते थे कि गंभीर सिंह नेगी को चेयरमैन बनाया जाए, लेकिन मुख्यमंत्री ने मंत्री को ओवररूल कर नियुक्ति कर दी।

- हेल्थ विभाग में लंबे समय से काम कर रही राजभरा मेडिकेयर कंपनी का टेंडर मुख्यमंत्री ने निरस्त कर दिया। फाइल मंत्री को भेजी ही नहीं गई।

- विश्व बैंक के हेल्थ से जुड़े 900 करोड़ के प्रोजेक्ट को पूर्व सीएम विजय बहुगुणा से स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने मंजूर कराया। हरीश रावत ने उसमें बदलाव कर दिया।


- सैनिक स्कूल निर्माण के लिए शिक्षा मंत्री केंद्र की बैठकों में शामिल होते रहे। जब दो स्कूल राज्य को मिले तो सीएम ने इन स्कूलों के निर्माण का काम लेकर सैनिक कल्याण विभाग को दे दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed