फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   Omicron Variant: Process Postponed for bringing Leopard from South Africa to India

ओमिक्रॉन का असर: फिर अधर में लटका दक्षिण अफ्रीका से 40 चीतों को भारत में लाने का मामला

Thu, 02 Dec 2021 10:20 AM IST
अलका त्यागी अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून
अरविंद सिंह, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Thu, 02 Dec 2021 10:20 AM IST
सार

भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम को इसी सप्ताह दक्षिण अफ्रीका जाना था जहां से 10 चीतों को भारत लाए जाने की तमाम प्रक्रिया को पूरी करना था।

विज्ञापन
Omicron Variant: Process Postponed for bringing Leopard from South Africa to India
चीता - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

दक्षिण अफ्रीका समेत दुनिया के कई देशों में जानलेवा कोरोना महामारी के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन के फैलने के बाद जहां हड़कंप की स्थिति है, वहीं नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) की पहल पर दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाए जाने का मामला एक बार फिर अधर में लटक गया है।

विज्ञापन


भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम को इसी सप्ताह दक्षिण अफ्रीका जाना था जहां से 10 चीतों को भारत लाए जाने की तमाम प्रक्रिया पूरी करनी थी। संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम को दक्षिण अफ्रीका भेजे जाने का फैसला टाल दिया गया है।

विज्ञापन

कोरोना के कारण दो साल से लटका है मामला

देश में विलुप्त हो चुके चीतों की चहलकदमी एक बार फिर जंगलों में दिखाई दे, इसके लिए एनटीसीए की पहल पर दक्षिण अफ्रीका से 40 चीतों को भारत लाए जाने की योजना बनाई गई। दोनों देशों की सरकार के बीच इस पर सहमति भी बन चुकी है। हालांकि इन चीतों को देश में लाए लाने की प्रक्रिया दो साल से जारी है लेकिन कोरोना संकट के चलते मामला लटकता रहा है। 

विज्ञापन
विज्ञापन


भारतीय वन्यजीव संस्थान के डीन एवं वरिष्ठ वन्यजीव विज्ञानी डॉ लवाईवी झाला के मुताबिक, कोरोना को लेकर स्थितियां सामान्य होगी तो संस्थान के वैज्ञानिकों की टीम को नए सिरे से दक्षिण अफ्रीका भेजने पर कोई निर्णय लिया जाएगा।

मध्यप्रदेश के कूनो पालपुर चिड़ियाघर में रखे जाएंगे चीते

डॉ. झाला ने बताया कि दक्षिण अफ्रीका से 40 चीतों को लाया जाना है, जिसमें पहले चरण में 10 चीते लाए जाएंगे। चीतों को फिलहाल मध्य प्रदेश के कूनो पालपुर चिड़ियाघर में रखा जाएगा जिसके लिए तमाम व्यवस्थाओं को भी पूरा कर लिया गया है। 

पूरी दुनिया में बचे हैं सिर्फ 12,400 चीतें 

आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी दुनिया में सिर्फ 12400 चीतें ही बचे हैं जिसमें सबसे अधिक 2,500 चीते नामीबिया के जंगलों में पाए जाते हैं। इसके अलावा दक्षिण अफ़्रीका और ईरान जैसे देशों में चीते पाए जाते हैं।

जहां तक भारत का सवाल है तो वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक, साल 1952 में चीते देश से पूरी तरह से विलुप्त हो गए थे। एक बार फिर देश के जंगल चीतों से आबाद हों, इसके लिए नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी की ओर से लंबे समय से कवायद जारी है। चीतों को बसाने को लेकर एनटीसीए की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की गई थी जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने चीतों को बसाने की अनुमति दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed