देखिए, पुराने पेड़ों को कैसे मिल रही ‘संजीवनी’
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प्रत्यारोपण के जरिए पुराने पेड़ों को अब नई जिंदगी मिल सकेगी। वे ऑक्सीजन के साथ-साथ राहगीरों को छांव भी दे सकेंगे। उत्तराखंड वन विभाग एक नर्सरी कंपनी के जरिए पेड़ों को संरक्षित कर रहा है।
उत्तर भारत में पहली बार उत्तराखंड की औद्योगिक नगरी सितारगंज में बड़े स्तर पर उम्रदराज पेड़ों काटने के बजाए उन्हें प्रत्यारोपित किया जा रहा है।सितारगंज औद्योगिक आस्थान सिडकुल फेज-टू में दो किमी फोरलेन का निर्माण करने के लिए 1052 पेड़ों को काटा जाना था, लेकिन वन विभाग ने इन पेड़ों को काटने के बजाय उनके प्रत्यारोपण के लिए पहल की।
जिसके तहत गत नवंबर से दिल्ली की मिस्टर रोहित नर्सरी कंपनी द्वारा फोरलेन निर्माण की जद में आने वाले आम, सेमल, कुकाट, गूलर, जामुन, ब्रोटा, बट, पीपल, लाजिस्टामिया और अमरूद आदि प्रजाति के पेड़ों को जड़ से उखाड़कर उन्हें कैलाश नदी के किनारे बंजर रेतीली जमीन पर प्रत्यारोपित किया जा रहा है।
प्रत्यारोपण का काम अप्रैल तक पूर्ण हो जाएगा, जिससे इन पेड़ों को नया जीवन मिलेगा और बंजर भूमि फिर हरीभरी होगी। पूर्वी तराई प्रभाग के उपखंड अधिकारी नवीन चंद्र पंत ने बताया कि उत्तर भारत में पहली बार उत्तराखंड में 1052 पेड़ों के प्रत्यारोपण का प्रयोग किया जा रहा है।
प्रत्यारोपण कर रही कंपनी का यह काम सफल हुआ तो इसका प्रचार-प्रसार किया जाएगा। वन भूमि हस्तांतरण के दौरान पेड़ों को काटने के बजाय शासन से प्रत्यारोपण का प्रस्ताव रखेंगे और पेड़ को काटने की नहीं, बल्कि उनके प्रत्यारोपण की अनुमति दी जाएगी।
ऐसे होता है प्रत्यारोपण
प्रत्यारोपण में पेड़ की जड़ खोदी जाती है। पहले चरण में एक तरफ से आधी जड़ काटी जाती है। एक माह बाद दूसरी तरफ से जड़ को काटते हैं। फिर उसकी जड़ों में केमिकल लगाकर उसका तीसरे माह में प्रत्यारोपण होता है। 10 फीट के पेड़ की जड़ निकालने के लिए तीन फीट गहरा गड्ढा खोदते हैं और 40 फीट लंबे पेड़ की 7 फीट गहरी जड़ होती है।
10 से 40 फीट लंबे हैं पेड़
सिडकुल में प्रत्यारोपित किए जा रहे पेड़ों में सबसे लंबा पेड़ 40 फीट ऊंचाई का है और सबसे छोटा पेड़ 10 फीट ऊंचा, जिनकी उम्र 5 से लेकर 70 वर्ष तक है।
साउथ इंडिया से आई तकनीक
उत्तराखंड में पहली बार सितारगंज में उम्रदराज पेड़ों के प्रत्यारोपण की तकनीक साउथ इंडिया से यहां पहुंची है। वन विभाग के अनुसार यह तकनीक अब से करीब पांच साल पहले शुरू हुई थी, जिसके तहत केरल, तमिलनाडु आदि जगहों पर पेड़ों का प्रत्यारोपण किया गया था।
ढाई करोड़ रुपए से हो रहा प्रत्यारोपण
औद्योगिक आस्थान सिडकुल में फोरलेने निर्माण की जद में आने वाले 1052 पेड़ों के प्रत्यारोपण में दो करोड़ 51 लाख चार हजार का खर्च आ रहा है। मिस्टर रोहित नर्सरी कंपनी के प्रोपराइटर अजय नागर ने बताया कि प्रत्यारोपण का खर्च प्रति पेड़ 19 हजार पांच सौ रुपए है। उम्रदराज पेड़ों को हरा-भरा होने में तीन से छह माह का समय लगता है।