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इन्हें दिक्कतें तमाम, फिर भी किया मतदान

Thu, 08 May 2014 11:48 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 08 May 2014 11:48 AM IST
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old age voter in dehradun

देहरादून में उम्र की बाधा और तमाम दुश्वारियां दरकिनार कर बुजुर्गों ने अपने वोट से सरकार चुनने का हौसला दिखाया।

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सर्वाधिक 105 साल की यमुना देवी ने बलबीर रोड स्थित मतदान केंद्र पर पोती के साथ वोट डाला। अलग-अलग सेंटरों पर 60 साल से ज्यादा उम्र वाली कई महिलाओं का जोश युवाओं को पछाड़ता नजर आया।
 
मोहिनी रोड निवासी यमुना देवी 105 साल की हैं। फिर भी पैदल ही वह वोट डालने पोलिंग बूथ आईं।

साथ उनकी पोती मनस्वी थीं। यमुना ने बताया कि वे आजादी के बाद से ही वोट डालती आई हैं। यह हमारा हक है, इसे क्यों छोड़े ?

झुकी कमर के साथ डिफेंस कॉलोनी से गोरखपुर की ओर आती हुई 90 साल की लीलावती बताती हैं, सबसे पहले बद्रीपुर में वोट डाला था। आज भी देने जा रही हूं, लेकिन फायदा नहीं दिखता।
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जज्बा आज भी युवाओं जैसा

old age voter in dehradun

नेहरू कॉलोनी की महेंद्र कौर 80 साल की हैं। वोट देने का जज्बा आज भी युवाओं जैसा ही है। महेंद्र कहती हैं- यह हमारा अधिकार है, इसे कैसे छोड़ सकते हैं। सरकार कुछ करे न करे, हम तो बदलाव की उम्मीद में वोट देते हैं।
 
63 साल की चंद्रकांता नौटियाल हर बार मजबूत और महंगाई पर लगाम की उम्मीद में वोट देती हैं। मगर हर बार उम्मीदें अधूरी रह जाती हैं। इस बार भी वोट डालने का मकसद वह इन्हीं चीजों को बताती हैं।

हाथों में लेकर हाथ, चले साथ-साथ
अजबपुर के प्राथमिक विद्यालय-एक में सुबह करीब 8 बजे बुजुर्ग महिला दंपति वीर सिंह नेगी (81) और जमुद्री देवी (75) को देख कर हर कोई निहारता रह गया।

एक दूजे का हाथ थामे यह दंपति धीरे-धीरे बूथ नंबर 3 की ओर गया। लंबी लाइन लगी होने के बावजूद लोगों ने दोनों को रास्ता देकर पहले वोट डालने भेजा।

वोट डालने के बाद वीर ने कहा कि हर बार बदलाव की सोच से वोट देते हैं, लेकिन कुछ नहीं बदलता। एक उम्मीद तो ही होती है, जिसके चलते वोट डालने चले आते हैं।

छह बजे से ही काटे बूथों के चक्कर

old age voter in dehradun

इस बार मतदान में बुजुर्गों का उत्साह देखने लायक रहा। तमाम बूथों पर सबसे पहले वोट डालने की हसरत में कई लोग सुबह 6 बजे से ही बूथों के चक्कर काटने लग गए।

पूछने पर बोले, इस बार बदलाव जरूर आएगा। केवी नंबर-2 हाथीबड़कला बूथ पर पूर्व सीएम निशंक से भी पहले लाइन में लगे शक्ति कॉलोनी निवासी एलके कांडपाल सबसे पहला वोटर बनना चाहते थे।

पत्नी सावित्री के साथ वे सुबह ही बूथ पहुंच गए। कहा कि मैं सबसे पहला वोटर बनूंगा। हालांकि निशंक के आने के चलते उनकी बारी बाद में आई।

कांडपाल ने कहा कि पहला वोटर बनने के लिए मैं सुबह पांच बजे उठ गया था। लाइन में लगे महिपाल सिंह पुंडीर ने कहा कि हम उत्साह दिखाएंगे, तभी देश से भ्रष्टाचार खत्म हो पाएगा।

गजियावाला राजकीय प्राथमिक विद्यालय में वोट डालने पहुंचे 65 वर्षीय सकल चंद को भी इस बार बदलाव की उम्मीद है।

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दिक्कतें तमाम, फिर भी मतदान

old age voter in dehradun

बीमारी और शारीरिक अपंगता को दरकिनार कर कुछ बुजुर्ग किसी गोद में वोट डालने पहुंचे तो कोई बैसाखियों के सहारे आकर वोट डाल गया।

विजय पार्क निवासी ओम प्रकाश ग्रोवर बोल नहीं सकते। पैरालाइज होने के चलते चलने-फिरने में भी सक्षम नहीं। मगर वोटिंग के लिए उनके इशारे ही पर्याप्त थे।

इसी तरह सोनू अवस्थी बैसाखी के सहारे लोकतंत्र के महाकुंभ को मजबूती देने पहुंचे। गढ़ी कैंट बूथ पर राजेंद्र सिंह भी चल फिर नहीं पाते, लेकिन बैसाखी के सहारे वोट देने पहुंचे।

इंद्रानगर-गल्जवाड़ी निवासी 97 वर्षीय वसुंधरा देवी को उनके पोते कंधे पर बिठाकर तीन किमी पैदल वोट के लिए लेकर गए।

वसुंधरा ने कई दिन पहले ही पोते से कह दिया था कि वोट जरूर दूंगी। पोते रॉबिन जोशी ने बताया कि दादी हमें मतदान के लिए प्रेरित करती हैं और साथ लेकर जाती हैं।

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