अब विधायक निधि नहीं होगी वापस, अफसर बना रहे प्लान
सूबे के मंत्रियों, विधायकों को उनके निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए दी जाने वाली विधायक निधि चालू वित्तीय वर्ष में ही खर्च की जा सके, इसके लिए अफसर नई नीति बनाने में जुट गए हैं।
विधायक निधि मद में मुहैया कराए गए बजट में से बेहद कम बजट खर्च होने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर आला अधिकारी इस पर मंथन कर रहे हैं। हालांकि नीति का मसौदा क्या होगा, इस पर अधिकारी कुछ भी खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं।
सरकार के ही आंकड़ों पर नजर डालें तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में विधायक निधि में 194.89 करोड़ का बजट जारी किया गया, जिसमें से माननीय महज 91.70 करोड़ का बजट इस्तेमाल कर पाए। कमोवेश यही स्थिति चालू वित्तीय वर्ष में है।
विधायक निधि में मंत्रियों व विधायकों को 142 करोड़ का बजट भी आवंटित कर दिया गया, लेकिन माननीय नौ माह बीत जाने के बाद अब तक महज 18.93 करोड़ का बजट खर्च कर पाए हैं।
पूर्व में भी बनी थी नीति, लेकिन नहीं बनी बात
दो दिन पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जब विधायक निधि से होने वाले विकास कार्यो की समीक्षा की तो वह भी बेहद कम बजट के इस्तेमाल को लेकर चिंतित दिखाई दिए। उनके फरमान के बाद अफसर नई नीति की कवायद में भी जुट गए हैं।
ज्ञात हो कि पूर्व में भी विधायकों द्वारा विधायक निधि का इस्तेमाल नहीं करने पर नीति बनाई गई थी कि चालू वित्तीय वर्ष में बजट का इस्तेमाल नहीं होने पर शेष बजट में महज 20 फीसदी धनराशि ही अगले साल के बजट में समायोजित होगी। इस प्रावधान के बाद विधायक निधि के इस्तेमाल में तेजी आई थी।
ज्यादातर विधायकों ने बजट खर्च किया था, लेकिन बाद में सरकार की इस नीति के बाद चालू वित्तीय वर्ष में शेष बजट का समायोजन अगले वित्तीय वर्ष के बजट में होने लगा, विधायक निधि के खर्च में कमी आ गई। सूत्रों का कहना है कि मंत्री व विधायकगण विधायक निधि क्रा इस्तेमाल इसलिए नही कर रहे हैं ताकि अधिकतम बजट का इस्तेमाल चुनाव से पहले किया जा सके, ताकि इसका परोक्ष या अपरोक्ष लाभ चुनाव में मिल सके।