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गजब! सीएम ने की पानी देने की घोषणा और अफसरों ने रोक दिया काम

Thu, 31 Aug 2017 03:58 PM IST
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून
नलिनी गुसाईं/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 31 Aug 2017 03:58 PM IST
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officer stops working after chief minister announcement
काम तेजी से होने की जगह ठप हो गया - फोटो : SELF

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पेयजल किल्लत दूर करने को हैंडपंपों को मोटर से जोड़ने की घोषणा की तो लोगों में उम्मीद जगी कि शायद अब बार-बार की परेशानी से छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन हुआ यूं कि सीएम के निर्देश के बाद काम तेजी से होने की जगह ठप हो गया।

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वजह यह है कि पहले यह काम जुगाड़ कर असुरक्षित ढंग से किया जा रहा था और सीएम के संज्ञान लेने के बाद अब अधिकारी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते।
देहरादून जिले के 3000 में से 1500 हैंडपंपों को मोटर से जोड़ा जाना है। कुछ जगह यह प्रयोग किया भी जा चुका है।

जल संस्थान की ओर से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 100 हैंडपंपों में मोटर कनेक्ट की जा चुकी है। लेकिन यह काम बेहद असुरक्षित ढंग से किया जा रहा था। न तो मोटर को सही से ढकने के लिए पैनल की ही सही व्यवस्था की गई और न ही हैंडपंप तक तार बिछाने के लिए कोई पुख्ता जरिया अपनाया गया।

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अधिकारी इस असुरक्षित काम को करने से कतरा रहे हैं

officer stops working after chief minister announcement
सभी जगह हैंडपंपों में मोटर लगा कर तुरंत लोगों को पानी दिया जाएगा
खुद दबी जवान में अधिकारी भी इसे बेहद रिस्की मान रहे हैं।

बीते दिनों सहसपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सामने जब लोगों ने पानी की समस्या रखी तो उन्होंने यहां घोषणा की थी कि जहां भी पानी की किल्लत है सभी जगह हैंडपंपों में मोटर लगा कर तुरंत लोगों को पानी दिया जाएगा। जिसके बाद से अधिकारी इस असुरक्षित काम को करने से कतरा रहे हैं।

जल संस्थान ने यह काम बंद कर गेंद पेयजल निगम के पाले में डाल दी है और पेयजल निगम भी इस काम को करने से कतरा रहा है। वजह यह है कि जो भी विभाग मोटर और बिजली की तार आदि डालने का काम करेगा, दुर्घटना होने की दशा में उसी की जिम्मेदारी मानी जाएगी।
 

यह हैं खतरे

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सीधे हैंडपंप पर मोटर डाल लोगों को सप्लाई कर रहा था पानी - फोटो : amar ujala
- हैंडपंपों में मोटर डालने के लिए डंडों और बल्लियों के सहारे तार हैंडपंप तक पहुंचाए गए, जिससे इनके गिरने से कभी भी कोई दुर्घटना हो सकती है।
- डंडों और बल्लियों के सहारे हैंडपंप तक पहुंचाए जा रहे झूलते तारों से भी खतरे की आशंका पैदा होती है।
- हैंडपंपों से जोड़ी जा रही मोटर के लिए सड़े-गले पैनलों का इस्तेमाल किया गया।
- अधिकतर जगह तारों में रबर आदि की सुरक्षा नहीं है, बारिश होने पर यह कभी भी खतरनाक साबित हो सकते हैं।
- हैंडपंपों के पास लगे मोटर और तारों से खासकर बच्चों और जानवरों को खतरा हो सकता है।

यह भी है आशंका
- हैंडपंपों में मोटर डालने के बाद इसका बिजली का खर्च सरकार देगी। खास बात यह है कि लोग मोटर के तारों में कटिया डालकर बिजली चोरी कर सकते हैं।
- प्रभावशाली लोग पानी के कनेक्शन सीधे अपनी लाइन में भी जुड़वा सकते हैं। ऐसा करके वो डबल कनेक्शन लेकर विभाग को चूना लगा सकते हैं।

चूंकि जल संस्थान ही सीधे तौर पर लोगों को पानी की सप्लाई देता है तो जहां भी किल्लत होती है वह सीधे हैंडपंप पर मोटर डाल लोगों को सप्लाई कर रहा था, लेकिन सीएम की घोषणा के बाद संस्थान ने निगम को पत्र भेज दिया है। काम कौन करेगा, साथ बैठकर तय किया जाएगा।

- जीतेंद्र देव, अधिशासी अभियंता, पेयजल निगम

जल संस्थान की ओर से कई जगह हैंडपंप पर मोटर डाली गई है। प्रयास किया जाता है कि संस्थान के अभियंता ऐसी जगहों पर पूरी नजर रखें। कहीं भी झूलती तारों आदि की शिकायत होती है तो वहां स्थिति सुधारने का प्रयास किया जाता है।
- मनीष सेमवाल, अधिशासी अभियंता, जल संस्थान

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