वाह रे अफसरशाही, पीआईएल दाखिल करने वाले को ही बनाया ‘टैक्स चोर’
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वाणिज्यकर विभाग में करोड़ों की कथित कर चोरी के मामले में दाखिल पीआईएल के जवाब में ब्यूरोक्रेसी की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल शपथपत्र में याचिकाकर्ता को ही टैक्स चोरी में लिप्त बताया गया है। इसी आधार पर इस पीआईएल को खारिज करने की मांग भी की गई है। इसका खुलासा आरटीआई के तहत महाधिवक्ता दफ्तर से लिए गए मुख्य सचिव के शपथपत्र से हुआ है।
दरअसल, अक्टूबर 2017 में रुड़की (हरिद्वार) निवासी धर्मेंद्र सिंह ने नैनीताल उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की। इसमें उत्तराखंड में वाणिज्यकर चोरी के लिए कथित तौर पर बने अधिकारियों, बड़े व्यापारिक घरानों, उद्योगों, व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों के सिंडीकेट की जांच कराने, सीबीआई तथा आयकर विभाग से अफसरों की अवैध संपत्तियों की जांच की मांग की गई है। हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार की ओर से मुख्य सचिव ने इस मामले में शपथपत्र दाखिल किया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता और आरटीआई कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने उत्तराखंड के महाधिवक्ता कार्यालय से इस शपथ पत्र के बारे में सूचना मांगी गई। जवाब में मुख्य सचिव की ओर से दिए गए शपथ पत्र और संलग्नकों की प्रतियां भेजी गईं। शपथ पत्र में याचिकाकर्ता धमेंद्र को ही यूपी में वाणिज्यकर चोरी का आरोपी बताते हुए याचिका खारिज करने की मांग की गई है। शपथपत्र के अनुसार याचिकाकर्ता को यूपी के अफसरों ने सवा 14 लाख का वाणिज्यकर वसूली का नोटिस भी थमा दिया है।
प्रतिवादी के पत्र पर सक्रिय हुए मेरठ के अफसर
अहम बात यह भी है कि शपथपत्र के साथ दाखिल पत्रों तथा टैक्स लगाने के आदेशों से साफ हो रहा है कि याचिकाकर्ता पर यह टैक्स जनहित याचिका के प्रतिवादी संख्या-12 ज्वाइंट कमिश्नर राज्यकर नवीन चंद्र जोशी (हरिद्वार में तैनात) ने ही यूपी के टैक्स अफसरों से पत्र व्यवहार करके लगवाया है। इसके लिए दोनों प्रदेशों के कमिश्नर कार्यालयों के बीच भी पत्र व्यवहार किया गया है।
कमिश्नर यूपी वाणिज्यकर की ओर से आयुक्त राज्यकर उत्तराखंड को 24 मई को भेजे पत्र में स्पष्ट लिखा है कि धर्मेंद्र सिंह का वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 का कर निर्धारण आदेश कर दिया गया। वर्ष 2013-14 के कर निर्धारण के लिए कार्यवाही कर दी गई है। 2016-17 तथा 2017-18 के कर निर्धारण के लिए नोटिस जारी कर दिए गए हैं। पत्र के अनुसार मेरठ के अफसरों को धमेंद्र के पते पर उनकी फर्म नारायण टायर वर्क्स की कोई व्यावसायिक गतिविधि या स्टाक नहीं मिला। हाईकोर्ट में दाखिल याचिकाकर्ता की आय की सूचना के आधार पर ही टैक्स लगाया गया।
याचिका में इन्हें बनाया गया है प्रतिवादी
जनहित याचिका में उत्तराखंड सरकार द्वारा मुख्य सचिव, सचिव वित्त, सचिव राजस्व, अपर सचिव वित्त, चीफ कमिश्नर ट्रेड टैक्स, डायरेक्टर जनरल आयकर (जांच) लखनऊ और सीबीआई के डायरेक्टर जनरल के अतिरिक्त उत्तराखंड वाणिज्यकर के 39 अधिकारियों को उनके नाम से पक्षकार बनाया गया है। इसमें सचिव वित्त, अपर सचिव वित्त, स्पेशल कमिश्नर के वाणिज्यकर के एक एडिशनल कमिश्नर, दो ज्वाइंट कमिश्नर, छह डिप्टी कमिश्नर, 15 असिस्टेंट कमिश्नर और 12 व्यापार कर अधिकारियों के नाम शामिल हैं।