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उत्तराखंड राज्य छोटा लेकिन सीएम की 'सेना' भीमकाय

Mon, 29 Sep 2014 11:41 AM IST
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून
अजित सिंह राठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 29 Sep 2014 11:41 AM IST
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officer in uttarakhand secretariat

उत्तराखंड भले ही छोटा राज्य हो लेकिन यहां के मुख्यमंत्री का सचिवालय इतना भीमकाय है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य के सीएम सचिवालय भी बौने हैं।

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लाव-लश्कर के वेतन-भत्तों पर लाखों खर्च
पड़ोसी हिमाचल और हरियाणा भी इसके आगे पानी भरते हैं। जाहिर है कि इस भारी-भरकम सचिवालयीय लाव-लश्कर के वेतन-भत्तों पर लाखों खर्च होते हैं। इनमें से कई पद तो ऐसे हैं जिनका कार्यकाल हर नए सीएम के साथ ही समाप्त हो जाता है।
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उत्तराखंड के सीएम सचिवालय में इस समय स्थायी व अस्थायी छोटे बड़े 36 अफसर तैनात हैं। मुख्य सचिव ग्रेड के आर्थिक सलाहकार इंदु कुमार पांडे से लेकर संयुक्त सचिव के बराबर वेतन पाने वाले कई ओएसडी भी हैं।
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कितने अफसर सीएम सचिवालय में नियुक्त होने चाहिए यह तो मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है, लेकिन उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में सीएम सचिवालय में इतनी बड़ी संख्या और यूपी जैसे विशालकाय प्रदेश के सीएम सचिवालय में मात्र 16 अफसर हैं।

उत्तराखंड सीएम सचिवालय में स्टाफ ( कुल 36)
एक सलाहकार (सीएस ग्रेड), एक प्रमुख सचिव, तीन सचिव, पांच अपर सचिव, एक संयुक्त सचिव, एक उप-सचिव, स्वागती, दस विशेष कार्याधिकारी, मीडिया मैनेजमेंट व सोशल मीडिया के लिए पांच प्रतिनिधि, दो पीआरओ, दो सूचना अधिकारी

हरियाणा सीएम सचिवालय का स्टाफ (कुल 15)
दो प्रमुख सचिव, दो अतिरिक्त प्रमुख सचिव, दो उप प्रमुख सचिव, तीन ओएसडी, एक मीडिया एडवाइजर दिल्ली, तीन मीडिया एडवाइजर चंडीगढ़ व एक मीडिया एडवाइजर रोहतक में और एक राजनीतिक सलाहकार

यूपी सीएम सचिवालय में कुल स्टाफ (कुल 15)
दो प्रमुख सचिव, चार सचिव, तीन विशेष सचिव, चार ओएसडी, तीन सूचना अधिकारी

हिमाचल प्रदेश सीएम सचिवालय का स्टाफ (कुल 10)
एक प्रमुख सचिव, एक विशेष सचिव, चार ओएसडी, एक प्रेस सचिव, तीन सलाहकार

...और इनकी हनक के आगे सब फीके

सीएम हरीश रावत के पुराने सहयोगी व पूर्व विधायक रणजीत रावत भी बगैर किसी पोर्ट फोलियो के चतुर्थ तल पर विराजते हैं। उस तल पर अफसर और नेताओं का जमावड़ा रहता है।


रुतबा ऐसा कि बड़े-बड़े लोगों को उनसे मिलने से पहले वक्त लेना पड़ता है। रणजीत, अनऑफिशियली सीएम की मदद करते है। सूत्रों की मानें तो शासकीय कार्यों में भी उनका दखल रहता है। मगर, किस हैसियत से उन्हें चौथे तल पर दो कमरे मिले हैं, इसे बताने के लिए सचिवालय में किसी की जुबान नहीं खुलती।

सीएम सचिवालय में बहुत ज्यादा अफसर नहीं हैं, जितने भी हैं उनकी जरूरत है। कुछ को शासन का दायित्व सौंपा है तो कुछ को सीधे जनता से जुड़े दायित्वों का निर्वहन करने के लिए रखा है। यह मितव्ययता भी नहीं है। मितव्ययता वहां होती है जहां खर्चा होता है और काम नहीं होता। यही वजह है कि सीएम सचिवालय में पेंडेंसी जीरो रहती है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड सरकार

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