उत्तराखंडः 'बौनों' की पेंशन पर पलीता लगाने में तुले अफसर
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की ‘ड्रीम स्कीम’ को भी अफसर पलीता लगा रहे हैं। पुरोहित ढूंढने में हाथ खड़े कर चुका समाज कल्याण विभाग अब बौने ढूंढने में भी घपला कर रहा है।
विभागीय अधिकारियों ने घर बैठे-बैठे सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करके भेज दी। किसी जिले में दो तो किसी में पांच बौने बता दिए गए। हरिद्वार में विभागीय अधिकारियों ने जिले में सिर्फ एक ही व्यक्ति के बौना होने की रिपोर्ट दी।
इस पर निदेशालय ने जब हरिद्वार के अधिकारियों को फटकार लगाई तो अगले दिन तीन बौने और रिपोर्ट कर दिए गए। इससे नाराज निदेशालय ने सर्वेक्षण रिपोर्ट ही खारिज कर दी है। नए सिरे से फिर प्रदेश में बौनों को ढूंढने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री की पसंदीदा पुरोहित पेंशन योजना के फ्लाप होने से असहज विभागीय आला अफसर बौना पेंशन के खटाई में पड़ने की आशंका से बेचैन हैं। चार फुट से कम लोगों को आठ सौ रुपये महीना पेंशन देने की योजना के बट्टे खाते में जाने का खतरा पैदा हो रहा है।
सिर्फ पांच जिलों ने ही रिपोर्ट
गत दिवस कैबिनेट ने इस योजना को सर्वसम्मति से पास किया था। इसके बाद विभाग को सर्वेक्षण कराने के आदेश दिए गए, लेकिन पुरानी योजनाओं की तरह इस योजना को भी अफसरों ने हवा-हवाई बना दिया। प्रदेश के 13 जिलों में से सिर्फ पांच जिलों ने ही रिपोर्ट भेजी। इस रिपोर्ट में भी निदेशालय ने घपला पाया। इस पर रिपोर्ट खारिज कर दी गई।
समाज कल्याण निदेशक वीएस धनिक ने बताया कि सर्वेक्षण रिपोर्ट ठीक नहीं थी। इस पर फिर से सर्वेक्षण के आदेश दिए गए हैं। सर्वेक्षण रिपोर्ट आने के बाद तहसीलवाले इसका सत्यापन करेंगे। इसके बाद पात्रों को पेंशन वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
इन जिलों से मिली सर्वेक्षण रिपोर्ट
हरिद्वार-4 बौने
नैनीताल-3 बौने
चंपावत-5 बौने
पौड़ी-25 बौने
बागेश्वर-4 बौने