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Dehradun News: कर्मचारी की वेतन पर्ची पाना आरटीआई के दायरे में नहीं
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देहरादून। किसी कर्मचारी की वेतन पर्ची (पे स्लिप) हासिल करना उसकी निजता का उल्लंघन है। इसे किसी अन्य व्यक्ति को सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत उपलब्ध नहीं कराया जा सकता लेकिन उस श्रेणी पर काम करने वाले कर्मचारियों को किसी वर्ष में कितना वेतन या अन्य भत्तों का भुगतान किया गया, इसकी जानकारी सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत उपलब्ध कराई जा सकती है।
राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि यदि किसी विभाग का कोई कर्मचारी खर्च हुई राशि को पाने के लिए संबंधित विभाग में बिल लगाता है और किसी कारण उसका भुगतान नहीं होता है तो सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत इसकी जानकारी हासिल नहीं की जा सकती लेकिन इस बिल के संदर्भ में विभाग में क्या प्रगति हुई है और उसकी इस समय उसकी स्थिति क्या है, इसके बारे में लोगों को जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
उत्तराखंड राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरटीआई कानून के अंतर्गत किसी आवेदक को ऐसी सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती जिससे किसी कर्मचारी विशेष की निजता प्रभावित होती हो, लेकिन आवेदक को यह सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है कि उस स्तर के कर्मचारियों को किसी वर्ष में कितना वेतन और भत्तों का भुगतान किया गया।
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क्या है पूरा मामला
दरअसल, पौड़ी गढ़वाल के जगमोहन सिंह गुंसाई ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत पशु चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी की वार्षिक वेतन पर्ची मांगी थी। इसके अलावा उन्होंने अपने दुर्गम क्षेत्र में कार्य करने के दौरान लगाए गए बिलों के भुगतान के संबंध में जानकारी मांगी थी। लेकिन आयोग ने कहा कि किसी कर्मचारी की वार्षिक वेतन पर्ची आरटीआई कानून के अंतर्गत उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।
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राज्य सूचना आयोग ने कहा है कि यदि किसी विभाग का कोई कर्मचारी खर्च हुई राशि को पाने के लिए संबंधित विभाग में बिल लगाता है और किसी कारण उसका भुगतान नहीं होता है तो सूचना अधिकार कानून के अंतर्गत इसकी जानकारी हासिल नहीं की जा सकती लेकिन इस बिल के संदर्भ में विभाग में क्या प्रगति हुई है और उसकी इस समय उसकी स्थिति क्या है, इसके बारे में लोगों को जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है।
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उत्तराखंड राज्य सूचना आयुक्त कुशलानंद कोठियाल ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि आरटीआई कानून के अंतर्गत किसी आवेदक को ऐसी सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती जिससे किसी कर्मचारी विशेष की निजता प्रभावित होती हो, लेकिन आवेदक को यह सूचना उपलब्ध कराई जा सकती है कि उस स्तर के कर्मचारियों को किसी वर्ष में कितना वेतन और भत्तों का भुगतान किया गया।
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क्या है पूरा मामला
दरअसल, पौड़ी गढ़वाल के जगमोहन सिंह गुंसाई ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत पशु चिकित्सा विभाग के एक अधिकारी की वार्षिक वेतन पर्ची मांगी थी। इसके अलावा उन्होंने अपने दुर्गम क्षेत्र में कार्य करने के दौरान लगाए गए बिलों के भुगतान के संबंध में जानकारी मांगी थी। लेकिन आयोग ने कहा कि किसी कर्मचारी की वार्षिक वेतन पर्ची आरटीआई कानून के अंतर्गत उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।