मोदी की शपथ के वक्त के पीछे छुपा है राज
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16 मई को लोकसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद शपथ ग्रहण समारोह में इतनी देरी क्यों की गई। इस पता चला गया है।
देश के भावी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शपथ से अनेक शुभ मुहूर्त और लग्न जुडे़ हैं।
गोधूलि बेला में राज्याभिषेक को ज्योतिषशास्त्र में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। संयोग देखिए कि 26 मई की शाम भरणी नक्षत्र पड़ रहा है। नाड़ी की चाल मध्य है।
चंद्रगुप्त मौर्य के लिए भी चाणक्य ने मध्य नाड़ी तथा भरणी नक्षत्र का योग चुना था। सोमवार को पड़ने वाले शिव प्रदोष में शपथ लेने वाले के लिए संसार खुशियों से भरा होता है।
ग्रह नक्षत्र हैं मोदी के अनुकूल
चुनाव परिणाम 16 मई को आ गए किंतु नरेंद्र मोदी यूं ही 26 मई को शपथ नहीं ले रहे हैं। इसके पीछे ज्योतिष के तमाम लग्न और मुहूर्त हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार जिस समय सायंकाल 6 बजे मोदी शपथ लेंगे, उस समय तुला लग्न है।
वृश्चिक राशि के नरेंद्र मोदी इसलिए भी भाग्यशाली है चूंकि तुला का स्वामी शुक्र चंद्रमा के साथ उसी समय सप्तम भाव में आ रहा है। मिश्रपुरी बताते हैं कि भरणी नक्षत्र का स्वामी भी शुक्र है।
तो इसलिए चुनी गई 26 तारीख
बताया गया है कि 23 मई से मोदी की कुंडली में शुक्र की महादशा 18 वर्ष 7 महीने और 2 दिनों के लिए शुरू हो गई है। शायद इसलिए भी शपथ ग्रहण को लंबा खींचकर 26 मई तक टाला गया है।
डॉ. मिश्रपुरी के अनुसार, लग्न में उच्चस्थ शनि, शनि पर गुरु और शुक्र की कृपा, चंद्रमा की पूर्ण दृष्टि, नवम् भाव में भाग्येश के साथ गुरु की युति बहुत कुछ संदेश दे रहे हैं।
6 से 6:20 बजे तक शपथ लेना सर्वोत्तम
ये ऐसे योग हैं जिनमें शपथ ग्रहण करने वाला चारों दिशाओं में ख्याति प्राप्त करता है।
मोदी के लिए परेशानी का केवल एक कारक अष्टम् भाव का सूर्य है। चूंकि सौरमंडल के अन्य सभी ग्रह और नक्षत्र नरेंद्र मोदी के पक्ष में है, अत: सूर्य की कृपा उन पर बनना निश्चित है।
ज्योतिषीय दृष्टि से गोधूलि बेला में सायं 6 से 6:20 बजे तक शपथ लेना सर्वोत्तम माना जाएगा।