{"_id":"60fc69a28ebc3e58273713d3","slug":"nutrition-tracker-app-becomes-headache-for-anganwadi-workers-city-news-drn3854570179","type":"story","status":"publish","title_hn":"पोषण ट्रैकर एप बना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मुसीबत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पोषण ट्रैकर एप बना आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मुसीबत
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कागजी कार्यों को खत्म करने व पूरी जानकारी का सही डाटा जमा करने के लिए बनाया गया पोषण ट्रैकर एप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए सिरदर्द बन गया है। कम पढ़ी-लिखी आंगबाड़ी कार्यकार्यता एप की बारीकियों को समझने के लिए माथापच्ची कर रही हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि डाटा हिंदी में भरा जा सकता है, लेकिन एप में कई गड़बड़ियां हैं।
छह साल तक के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं का सारा डाटा पोषण ट्रैकर एप के जरिए ही दिया जाना है। इसके जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कागजी कार्यों से मुक्त किया जाना भी है। फिलहाल आंगवबाड़ी कार्यकर्ता एप की तकनीकी दिक्कतों से परेशान हैं। वहीं विभाग का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एप की जानकारी के लिए ट्रेनिंग दी गई है।
डाटा भरने में मेरे बच्चे मेरी मदद करते हैं। पुराने एप में इतनी दिक्कत नहीं थी, लेकिन कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कम पढ़ी-लिखी हैं। जब तक हम एक एप को समझते हैं तब तक दूसरे एप में हमें उलझा दिया जाता है। फील्ड से आने के बाद बच्चों को सबसे पहले एप में डाटा फीड करने को कहती हूं। मुझे अंग्रेजी में डाटा फीड करना नहीं आता। कई बार मैंने कोशिश की, लेकिन हिंदी में नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
-लक्ष्मी पंत, प्रांतीय कोषाध्यक्ष, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेविका कर्मचारी संगठन (सीटू)
मैं जो डाटा फीड कर रही हूं वो एप पर कुछ और दिखाता है। लाभार्थियों की संख्या ही गलत दर्शाता है। इसलिए मैं कई बार विभाग में ही जाकर पूछती हूं, लेकिन वहां जाकर बताने के बाद भी डाटा सही नहीं होता है। एप में कई खामियां हैं। इससे सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परेशान हैं। विभाग की ओर से जो ट्रेनिंग दी गई वो महज खानापूर्ति थी। ऑफलाइन ट्रेनिंग में ही तकनीकी जानकारियां समझना मुश्किल होता है। विभाग को लगता है कि ऑनलाइन ट्रेनिंग में ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समझ में आ जाएगा।
-सुधा शर्मा, जिला अध्यक्ष, उत्तरांचल आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ संगठन
पुराने एप पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब धीरे-धीरे आदत बन चुकी थी, लेकिन तब तक यह दूसरा एप हम पर थोप दिया गया। नेटवर्क की समस्या अलग है। विभाग तकनीकी रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सक्षम बनाना चाहता है, लेकिन हमारी समस्याओं की ओर नहीं देख रहा। एप पर डाटा भरना हमारे लिए अनिवार्य कर दिया है। हमारा मानदेय भी अब इसी से तय होगा। ऐसी हमें सूचना मिली है। इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता डाटा भरने में किसी न किसी की मदद ले रही हैं। कोई बहू से तो कोई बच्चों से डाटा भरवा रहा है।
-रजनी गुलेरिया, महामंत्री, सीटू
एप का अभी शुरुआती चरण ही है। इसलिए अभी उसमें बहुत सी दिक्कते आ रही हैं। एप में जो भी सुधार होगा वह भारत सरकार के स्तर पर ही होगा। डाटा फीड कर रहे हैं तो लाभार्थी दिखता नहीं है। हम सरकार को इस संबंध में पत्र लिख रहते हैं। विभाग आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की इस दिक्कत को समझता है, लेकिन हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। यह सभी सुधार भारत सरकार की ओर से ही किए जाने हैं। इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। उम्मीद है अगले दो-तीन महीनों में यह समस्या दूर हो जाएगी। आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपना काम करना ही पड़ेगा, लेकिन जो दिक्कतें आ रहीं उसके लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए वह इसे लेकर परेशान न हों।
-अखिलेश मिश्रा, डीपीओ
विज्ञापन
छह साल तक के बच्चों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं का सारा डाटा पोषण ट्रैकर एप के जरिए ही दिया जाना है। इसके जरिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को कागजी कार्यों से मुक्त किया जाना भी है। फिलहाल आंगवबाड़ी कार्यकर्ता एप की तकनीकी दिक्कतों से परेशान हैं। वहीं विभाग का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को एप की जानकारी के लिए ट्रेनिंग दी गई है।
विज्ञापन
डाटा भरने में मेरे बच्चे मेरी मदद करते हैं। पुराने एप में इतनी दिक्कत नहीं थी, लेकिन कई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता कम पढ़ी-लिखी हैं। जब तक हम एक एप को समझते हैं तब तक दूसरे एप में हमें उलझा दिया जाता है। फील्ड से आने के बाद बच्चों को सबसे पहले एप में डाटा फीड करने को कहती हूं। मुझे अंग्रेजी में डाटा फीड करना नहीं आता। कई बार मैंने कोशिश की, लेकिन हिंदी में नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
-लक्ष्मी पंत, प्रांतीय कोषाध्यक्ष, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सेविका कर्मचारी संगठन (सीटू)
मैं जो डाटा फीड कर रही हूं वो एप पर कुछ और दिखाता है। लाभार्थियों की संख्या ही गलत दर्शाता है। इसलिए मैं कई बार विभाग में ही जाकर पूछती हूं, लेकिन वहां जाकर बताने के बाद भी डाटा सही नहीं होता है। एप में कई खामियां हैं। इससे सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता परेशान हैं। विभाग की ओर से जो ट्रेनिंग दी गई वो महज खानापूर्ति थी। ऑफलाइन ट्रेनिंग में ही तकनीकी जानकारियां समझना मुश्किल होता है। विभाग को लगता है कि ऑनलाइन ट्रेनिंग में ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को समझ में आ जाएगा।
-सुधा शर्मा, जिला अध्यक्ष, उत्तरांचल आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ संगठन
पुराने एप पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अब धीरे-धीरे आदत बन चुकी थी, लेकिन तब तक यह दूसरा एप हम पर थोप दिया गया। नेटवर्क की समस्या अलग है। विभाग तकनीकी रूप से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सक्षम बनाना चाहता है, लेकिन हमारी समस्याओं की ओर नहीं देख रहा। एप पर डाटा भरना हमारे लिए अनिवार्य कर दिया है। हमारा मानदेय भी अब इसी से तय होगा। ऐसी हमें सूचना मिली है। इसलिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता डाटा भरने में किसी न किसी की मदद ले रही हैं। कोई बहू से तो कोई बच्चों से डाटा भरवा रहा है।
-रजनी गुलेरिया, महामंत्री, सीटू
एप का अभी शुरुआती चरण ही है। इसलिए अभी उसमें बहुत सी दिक्कते आ रही हैं। एप में जो भी सुधार होगा वह भारत सरकार के स्तर पर ही होगा। डाटा फीड कर रहे हैं तो लाभार्थी दिखता नहीं है। हम सरकार को इस संबंध में पत्र लिख रहते हैं। विभाग आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की इस दिक्कत को समझता है, लेकिन हम इसमें कुछ नहीं कर सकते। यह सभी सुधार भारत सरकार की ओर से ही किए जाने हैं। इसके लिए प्रयास भी किए जा रहे हैं। उम्मीद है अगले दो-तीन महीनों में यह समस्या दूर हो जाएगी। आगंनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अपना काम करना ही पड़ेगा, लेकिन जो दिक्कतें आ रहीं उसके लिए वो जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए वह इसे लेकर परेशान न हों।
-अखिलेश मिश्रा, डीपीओ