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राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर: घुसपैठियों पर उत्तराखंड सरकार करेगी वार, निशाने पर हैं ये तीन जिले

Wed, 18 Sep 2019 08:29 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून
राकेश खंडूड़ी, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 18 Sep 2019 08:29 AM IST
सार

  • निशाने पर दून, यूएसनगर व हरिद्वार 
  • मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत बोले, कैबिनेट में लाया जाएगा इसका प्रस्ताव 
  • उत्तराखंड सीमांत राज्य होने के चलते एनआरसी को बताया बेहद जरूरी 

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NRC Uttarakhand government will attack intruders, these three districts on target
- फोटो : Amar Ujala

विस्तार

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश में घुसपैठियों को निकाल बाहर करने के लिए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की कवायद शुरू करने के संकेत दिए हैं। उनके इस कथन ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है। पिछले करीब एक दशक के दौरान उत्तराखंड में प्रदेश से बाहर के लोगों की आमद हुई है। हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर को इस मामले में ज्यादा संवेदनशील माना जाता है। 

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सीमांत प्रदेश होने के कारण प्रदेश के सीमा वाले क्षेत्रों में हमेशा से घुसपैठ का अंदेशा रहा है, लेकिन प्रदेश के मैदानी जनपदों में जिस तरह से गैर उत्तराखंडी आबादी का फैलाव हुआ है। उससे राज्य के हुक्मरानों और नीति नियंताओं को कुछ हद तक सोचने के लिए मजबूर जरूर किया है।
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यह सवाल तब और भी अधिक ध्वनित हुआ जब हरिद्वार जिले के पिरान कलियर में नासिर नामक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया। इस व्यक्ति ने पुलिस को बताया कि वो बांग्लादेश के ढाका का नागरिक है। इस खुलासे के बाद से हरिद्वार में रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशियों की घुसपैठ एक बड़ी पहेली है। जिसे हल करने के लिए भाजपा विधायक संजय गुप्ता मुख्यमंत्री से लेकर जिलाधिकारी तक से बार-बार मांग उठा चुके हैं।

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घुसपैठ को लेकर चिंता

संजय गुप्ता कहते हैं,‘ मैं लगातार ये मुद्दा उठा रहा हूं कि हरिद्वार के आसपास क्षेत्रों में रहने वाले संदिग्धों की पहचान हो। वे यकीन के साथ कह सकते हैं कि यहां बड़ी संख्या ऐसे लोग रह रहे हैं, जो बांग्लादेश से आए हैं। उनमें रोहिंग्या मुसलमान हो सकते हैं। जनपद में घुसपैठ को लेकर चिंता जाहिर करने वाले भाजपा विधायक के अलावा हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक भी शामिल हैं। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. निशंक ने घुसपैठियों को लेकर जिलाधिकारी को निर्देश दे चुके हैं।

जब पिरान कलियर में संदिग्ध पकड़ा गया था, तो उस दौरान उन्होंने कहा था कि राज्य के शांत वातावरण के लिए घुसपैठिए खतरा है। तब इस मसले को केंद्रीय गृह मंत्रालय में उठाने की बात कही थी। हालांकि एक संदिग्ध के पकड़े जाने के बाद हुई जांच में और कितने संदिग्धों की पहचान हुई, ये खुलासा पुलिस और प्रशासन आज तक नहीं कर पाया है, लेकिन सर्वाधिक आबादी वाले प्रदेश के तीन जिले हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर में फ्लोटिंग आबादी का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

तीन पीढ़ी से रह रहे पर नागरिकता के सबूत नहीं  

1971 से पहले बसे उन बांग्लादेशी शरणार्थियों का भविष्य भी सवालों में है, जिनके पास नागरिकता के सबूत नहीं हैं। तीन पीढ़ियों से वे उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में रह रहे हैं। उनमें से कोई सरकारी शिक्षक है तो कोई डाक्टर, कोई इंजीनियर है तो कोई बाबू।

पर संकट यह है कि राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर पर जब नाम दर्ज होंगे और उनमें से हजारों लोग अपनी नागरिकता का सबूत नहीं दे पाएंगे। ऐसे में उनके भविष्य का क्या होगा? इस प्रश्न ने असम में 19 लाख से अधिक लोगों के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर से बाहर हो जाने के बाद से बांग्लादेशी शरणार्थियों की नींद उड़ा रखी है।

बंगाली यूथ आर्गेनाइजेशन के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट जीवन राय के मुताबिक, ‘ऐसे तीन लाख से अधिक लोग हैं जो तीन पीढ़ियों से उत्तराखंड में रह रहे हैं, लेकिन आगजनी, बाढ़ और अन्य घटनाओं में इनमें से हजारों लोगों ने अपने दस्तावेजों को गंवा दिया है। ये दस्तावेज उनके शरणार्थी होने के सबूत थे। ऐसे लोगों को लेकर निश्चिततौर पर चिंता है।’ हालांकि 70 फीसदी लोगों के पास पर्याप्त दस्तावेज हैं, जो उनकी भारतीय नागरिकता का मजबूत आधार होने चाहिए। चिंता की बात यह है कि शरणार्थी होने के समय का जो प्रमाणपत्र उनके पास है, असम में उसे राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में नाम दर्ज कराने का आधार नहीं माना गया। प्रदेश में 1971 से पहले जितने बांग्लादेश से शरणार्थी आए उन्हें अपने भूमि, स्कूल से जुड़े सभी प्रमाणपत्र राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) के लिए अप्रैल 2020 तक जमा करने हैं।

‘एनआरसी का वाहियात सवाल ध्यान भटकाने के लिए’

नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन (एनआरसी) पर सीएम त्रिवेंद्र सिहं रावत के ताजा बयान पर कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश सरकार अच्छी सरकार देती, तो एनआरसी के वाहियात सवाल पर बात न करती। इस पर बात सिर्फ इसलिए हो रही है क्योंकि सरकार अच्छी नहीं चल रही है और सीएम इससे लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं।

कांग्रेस के असम प्रभारी हरीश रावत ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि एनआरसी की बात सिर्फ असम के परिप्रेक्ष्य में हुई थी। वहां भी इसके लिए करोड़ों घुसपैठियों की मौजूदगी की बात को आधार बनाया गया था, लेकिन सब जानते हैं कि यह मसला किस कदर धराशायी हुआ है। उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य अब एनआरसी की मांग नहीं कर सकता है। सिर्फ वह राज्य मांग करेगा, जो अच्छी सरकार नहीं दे पा रहा है। उत्तराखंड की सरकार भी ऐसा ही कर रही है। बेहतर हो कि त्रिवेंद्र सरकार जनता के मुद्दों पर अच्छे ढंग से काम करे।

राज्य के लिए आसान नहीं है यह राह

एनआरसी को अपने स्तर पर तैयार करना राज्य के लिए आसान नहीं है। असम को छोड़कर अन्य राज्योें में एनआरसी तैयार करने का मामला अभी केंद्र सरकार के पाले में हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पर काम कर रहा है और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी कह चुके हैं कि एनआरसी को अन्य राज्यों में भी तैयार कराया जाएगा। केंद्र अगर राज्यों के लिए यह प्रावधान कर देता है तो उत्तराखंड में भी यह रजिस्टर तैयार होने की राह बन सकती है। 

नेशनल जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) सितंबर, 2020 तक तैयार करने का फैसला केंद्र सरकार ले चुकी है। यह रजिस्टर ही असम की तर्ज पर देश के अन्य राज्यों में  एनआरसी (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजनशिप ) तैयार करने का आधार बन सकता है। सिटीजनशिप एक्ट 1955 के तहत भारत के प्रत्येक नागरिक का पंजीकरण होना और उसे एक राष्ट्रीय पहचानपत्र जारी करना अनिवार्य है। 2003 में इससे संबंधित नियमावली भी जारी की थी। एनआरसी अधिनियम में भारत के शेष राज्यों से इतर असम में नेशनल सिटीजनशिप रजिस्टर तैयार करने के लिए विशेष प्रावधान भी है। इसी के तहत 1971 में असम में एनसीआर तैयार किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस रजिस्टर को अपडेट करना शुरू किया गया। 

यह करना होगा केंद्र को 
- 2003 में जारी की गई नियमावली के मुताबिक केंद्र सरकार को राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर तैयार करना होगा। जनसंख्या रजिस्टर में शहर, कस्बे या किसी अन्य स्थान पर रहने वाले व्यक्ति की जानकारी दर्ज होगी। 
- राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर में भारत और देश से बाहर रहने वाले भारतीय नागरिक से संबंधित जानकारी दर्ज की जाएगी।

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