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अब एनबीसीसी करेगा रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना का काम
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देहरादून। रिस्पना और बिंदाल नदी को चैनेलाइज करने की महत्वाकांक्षी रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना का काम अब नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) करेगा। काफी समय से योजना का काम रुका हुआ है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय शहर की दोनों प्रमुख नदियों रिस्पना और बिंदाल को चैनेलाइज करने के लिए रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना पर काम शुरू हुआ। इसके तहत शहरी क्षेत्र के 36 किलोमीटर दायरे में दोनों नदियों को चैनेलाइज किया जाना था। कारगी के पास नदी के एक बड़े हिस्से को चैनेलाइज कर योजना की शुरुआत भी की गई, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही ये काम पूरी तरह बंद हो गया।
अब करीब तीन साल बाद सरकार एक बार फिर इस योजना पर काम करने जा रही है। एमडीडीए वीसी रणवीर चौहान ने बताया कि जल्द ही एनबीसीसी से एमओयू किया जाएगा। नदियों के चैनेलाइज होने से जहां एक तरफ उनकी सुंदरता बढ़ेगी, वहीं दोनों तरफ की भूमि समतल भी होगी। इस भूमि का इस्तेमाल एमडीडीए के कई प्रोजेक्ट के लिए किया जा सकेगा।
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लैंड बैंक बनाने की थी योजना
पूर्ववर्ती सरकार के समय नदियों को चैनेलाइज करने के बाद किनारों की जमीन का लैंड बैंक बनाने की योजना थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल किया। नदियों को चैनेलाइज करने के साथ ही उसके दोनों तरफ मरीन ड्राइव, वॉकिंग व साइकिलिंग ट्रैक बनाने की भी योजना थी। इसके अलावा जमीन का इस्तेमाल रेस्टोरेंट, फूड प्लाजा, हाउसिंग प्रोजेक्ट व कमर्शियल प्रोजेक्ट में भी होना था।
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नदियों की सफाई की भी थी योजना
रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत शहर की दोनों प्रमुख नदियों की सफाई और उनको पुनर्जीवित करने की भी योजना थी। हालांकि, मलिन बस्तियों के किनारे बसे लोगों को हटाने और वहां नदियों को चैनेलाइज करने पर सरकार अंत तक स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई। मौजूदा सरकार का भी इस मामले में रुख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बाकी जगह नदियों को चैनेलाइज करने का कोई फायदा नहीं रह जाएगा।
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पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय शहर की दोनों प्रमुख नदियों रिस्पना और बिंदाल को चैनेलाइज करने के लिए रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना पर काम शुरू हुआ। इसके तहत शहरी क्षेत्र के 36 किलोमीटर दायरे में दोनों नदियों को चैनेलाइज किया जाना था। कारगी के पास नदी के एक बड़े हिस्से को चैनेलाइज कर योजना की शुरुआत भी की गई, लेकिन सरकार बदलने के साथ ही ये काम पूरी तरह बंद हो गया।
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अब करीब तीन साल बाद सरकार एक बार फिर इस योजना पर काम करने जा रही है। एमडीडीए वीसी रणवीर चौहान ने बताया कि जल्द ही एनबीसीसी से एमओयू किया जाएगा। नदियों के चैनेलाइज होने से जहां एक तरफ उनकी सुंदरता बढ़ेगी, वहीं दोनों तरफ की भूमि समतल भी होगी। इस भूमि का इस्तेमाल एमडीडीए के कई प्रोजेक्ट के लिए किया जा सकेगा।
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लैंड बैंक बनाने की थी योजना
पूर्ववर्ती सरकार के समय नदियों को चैनेलाइज करने के बाद किनारों की जमीन का लैंड बैंक बनाने की योजना थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल किया। नदियों को चैनेलाइज करने के साथ ही उसके दोनों तरफ मरीन ड्राइव, वॉकिंग व साइकिलिंग ट्रैक बनाने की भी योजना थी। इसके अलावा जमीन का इस्तेमाल रेस्टोरेंट, फूड प्लाजा, हाउसिंग प्रोजेक्ट व कमर्शियल प्रोजेक्ट में भी होना था।
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नदियों की सफाई की भी थी योजना
रिवरफ्रंट डेवलपमेंट योजना के तहत शहर की दोनों प्रमुख नदियों की सफाई और उनको पुनर्जीवित करने की भी योजना थी। हालांकि, मलिन बस्तियों के किनारे बसे लोगों को हटाने और वहां नदियों को चैनेलाइज करने पर सरकार अंत तक स्थिति स्पष्ट नहीं कर पाई। मौजूदा सरकार का भी इस मामले में रुख स्पष्ट नहीं है। ऐसे में बाकी जगह नदियों को चैनेलाइज करने का कोई फायदा नहीं रह जाएगा।