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हैलीकॉप्टर नहीं खच्चर भरेंगे केदारनाथ की 'उड़ान'

Fri, 20 Sep 2013 06:16 PM IST
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
अमर उजाला, रुद्रप्रयाग Updated Fri, 20 Sep 2013 06:16 PM IST
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now mule could reach in Kedarnath

अब केदारनाथ धाम में बार-बार सामग्री के लिए हैलीकॉप्टरों की राह नहीं ताकनी पड़ेगी और ना ही खराब मौसम से मायूसी हाथ लगेगी।

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लोक निर्माण विभाग केदारनाथ में खच्चरों के पहुंचने के लिए तेजी से मार्ग का निर्माण कर रहा है, जिससे केदारधाम के पुर्नर्निमाण में सहूलियतें मिल सकेंगी।

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चॉपर पर निर्भरता होगी कम
सोनप्रयाग से केदारनाथ पैदल मार्ग को लोक निर्माण विभाग खच्चरों के चलने लायक बना रहा है। खच्चरों के चलने के बाद केदारनाथ तक सामग्री का ढुलान आसान हो जाएगा। इससे हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता भी कम हो जाएगी।

विगत जून माह में आपदा से गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग (14 किलोमीटर) कई स्थानों पर पूरी तरह से तबाह हो गया था।

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पहले के मुकाबले अधिक कष्टदायक है मार्ग
सोनप्रयाग से गौरीकुंड तक केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग के ध्वस्त होने के कारण यहां भी पैदल चलना पड़ रहा है। पैदल मार्ग सहित गुप्तकाशी क्षेत्र में ध्वस्त सड़कों का शीघ्र निर्माण हो, इसलिए सरकार को गुप्तकाशी में लोनिवि का नया सर्किल ऑफिस खोलना पड़ा।
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लोनिवि ने जल्दबाजी में पैदल मार्ग का निर्माण किया है, लेकिन यह मार्ग पहले के मुकाबले ज्यादा लंबा और कष्टदायक हो गया है।

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मार्ग डेढ़ किमी अतिरिक्त
उक्त मार्ग से पैदल केदारनाथ गए भाजपा जिलाध्यक्ष विजय कप्रवाण बताते हैं कि गौरीकुंड से करीब डेढ़ किलोमीटर ऊपर लगभग 50 मीटर पैच आपदा से ध्वस्त हो गया था।

अब यहां पर दूसरे छोर तक पहुंचने के लिए करीब डेढ़ किमी अतिरिक्त चलना पड़ रहा है। भीमबली से ऊपर भी खड़ी चढ़ाई है।

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चार किलोमीटर शेष
इधर, लोनिवि के अधीक्षण अभियंता केके श्रीवास्तव का कहना है कि सोनप्रयाग से रामबाड़ा तक मार्ग को खच्चरों के चलने लायक बनाया गया है।

रामबाड़ा से करीब ढाई किलोमीटर और केदारनाथ से नीचे की ओर करीब चार किलोमीटर मार्ग पर भी खच्चर चल सकते हैं। अब लगभग चार किलोमीटर पैच चौड़ा करना शेष रह गया है।

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