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राजधानी में अब एएनपीआर कैमरों से होगी गाड़ियों के प्रदूषण की निगरानी
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राजधानी में प्रदूषण फैलाने वाले निजी, व्यावसायिक वाहनों की अब परिवहन विभाग की टीमों के साथ अत्याधुनिक आटोमेटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन कैमरों (एएनपीआर) से भी निगरानी होगी। इसको लेकर परिवहन विभाग की ओर से राजधानी के चार प्रमुख स्थानों आईएसबीटी, जोगीवाला, घंटाघर और सहस्रधारा क्रासिंग में चार अत्याधुनिक एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे, जिसका विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।
ये कैमरे इस बात की जानकारी देंगे कि गाड़ियों के प्रदूषण की जांच हुई है या नहीं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 31 अक्तूबर तक कैमरे लगाने का काम पूरा करने के साथ ही एक नवंबर से एएनपीआर कैमरों से गाड़ियों की निगरानी भी शुरू कर दी जाएगी। इन कैमरों के अलावा राजधानी के अलग-अलग इलाकों में भी सघन जांच अभियान चलाकर की गाड़ियों के प्रदूषण की जांच की जाएगी। आरटीओ प्रवर्तन सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि राजधानी की सड़कों पर तमाम ऐसे निजी और व्यावसायिक वाहन फर्राटा भर रहे, जो बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैला रहे हैं। हालांकि, विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे वाहन वाहनों को चिह्नित करने के साथ ही कार्रवाई भी की गई।
अब प्रदूषण की जांच के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जा सके, इसके लिए आईएसबीटी चौराहा, जोगीवाला, घंटाघर और सहस्त्रधारा क्रॉसिंग पर चार कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों को परिवहन विभाग के सारथी सॉफ्टवेयर से भी जोड़ा जा रहा है। एएनपीआर कैमरे की निगरानी में जो भी वाहन प्रदूषण फैलाते हुए पकड़े जाएंगे, उनका सारा डाटा सारथी को भेज दिया जाएगा और फिर गाड़ियों का चालान करने के साथ ही जानकारी वाहन स्वामियों के मोबाइल पर भी भेज दी जाएगी। शर्मा ने बताया कि आईएसबीटी, जोगीवाला, घंटाघर और सहस्रधारा क्रांसिंग के अलावा राजधानी के अन्य इलाकों में प्रमुख चौराहों पर विभागीय टीम तैनात करने के साथ ही गाड़ियों की चेकिंग की जाएगी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों का को चिह्नित कर वाहन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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व्यस्ततम चौराहों पर पीएम-10 की मात्रा दोगुनी
आरटीओ प्रवर्तन सुनील कुमार शर्मा के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से की गई जांच में यह बात सामने आई कि राजधानी के कई बड़े चौराहों के आसपास पीएम-10 की मात्रा 186 माइक्रोमीटर प्रति क्यूबिक मीटर जो निर्धारित मानक से औसतन दोगुना है, जो शहरियों की सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है।
प्रदूषण जांच के लिए पांच मोबाइल लैब भी
आरटीओ प्रवर्तन के मुताबिक, जिन गाड़ियों के प्रदूषण संबंधी कागजात हैं, उन गाड़ियों के प्रदूषण स्तर की जांच की जा सके, इसके लिए राजधानी के अलग-अलग इलाकों में गाड़ियों की प्रदूषण जांच करने वाली पांच मोबाइल लैब की भी तैनाती की जा रही है। इन मोबाइल लैब से गाड़ियों को रोककर विशेषज्ञों द्वारा प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। जांच में जिन गाड़ियों का प्रदूषण स्तर निर्धारित मानक से अधिक पाया जाएगा, उन गाड़ियों के वाहन स्वामियों के खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए नए मोटर व्हीकल एक्ट में प्रावधान है कि जिन गाड़ियों द्वारा निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैलाया जा रहा, उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए।
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ये कैमरे इस बात की जानकारी देंगे कि गाड़ियों के प्रदूषण की जांच हुई है या नहीं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 31 अक्तूबर तक कैमरे लगाने का काम पूरा करने के साथ ही एक नवंबर से एएनपीआर कैमरों से गाड़ियों की निगरानी भी शुरू कर दी जाएगी। इन कैमरों के अलावा राजधानी के अलग-अलग इलाकों में भी सघन जांच अभियान चलाकर की गाड़ियों के प्रदूषण की जांच की जाएगी। आरटीओ प्रवर्तन सुनील कुमार शर्मा ने बताया कि राजधानी की सड़कों पर तमाम ऐसे निजी और व्यावसायिक वाहन फर्राटा भर रहे, जो बड़े पैमाने पर प्रदूषण फैला रहे हैं। हालांकि, विभाग की ओर से समय-समय पर अभियान चलाकर ऐसे वाहन वाहनों को चिह्नित करने के साथ ही कार्रवाई भी की गई।
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अब प्रदूषण की जांच के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जा सके, इसके लिए आईएसबीटी चौराहा, जोगीवाला, घंटाघर और सहस्त्रधारा क्रॉसिंग पर चार कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों को परिवहन विभाग के सारथी सॉफ्टवेयर से भी जोड़ा जा रहा है। एएनपीआर कैमरे की निगरानी में जो भी वाहन प्रदूषण फैलाते हुए पकड़े जाएंगे, उनका सारा डाटा सारथी को भेज दिया जाएगा और फिर गाड़ियों का चालान करने के साथ ही जानकारी वाहन स्वामियों के मोबाइल पर भी भेज दी जाएगी। शर्मा ने बताया कि आईएसबीटी, जोगीवाला, घंटाघर और सहस्रधारा क्रांसिंग के अलावा राजधानी के अन्य इलाकों में प्रमुख चौराहों पर विभागीय टीम तैनात करने के साथ ही गाड़ियों की चेकिंग की जाएगी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों का को चिह्नित कर वाहन स्वामियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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व्यस्ततम चौराहों पर पीएम-10 की मात्रा दोगुनी
आरटीओ प्रवर्तन सुनील कुमार शर्मा के मुताबिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से की गई जांच में यह बात सामने आई कि राजधानी के कई बड़े चौराहों के आसपास पीएम-10 की मात्रा 186 माइक्रोमीटर प्रति क्यूबिक मीटर जो निर्धारित मानक से औसतन दोगुना है, जो शहरियों की सेहत के लिहाज से ठीक नहीं है।
प्रदूषण जांच के लिए पांच मोबाइल लैब भी
आरटीओ प्रवर्तन के मुताबिक, जिन गाड़ियों के प्रदूषण संबंधी कागजात हैं, उन गाड़ियों के प्रदूषण स्तर की जांच की जा सके, इसके लिए राजधानी के अलग-अलग इलाकों में गाड़ियों की प्रदूषण जांच करने वाली पांच मोबाइल लैब की भी तैनाती की जा रही है। इन मोबाइल लैब से गाड़ियों को रोककर विशेषज्ञों द्वारा प्रदूषण स्तर की जांच की जाएगी। जांच में जिन गाड़ियों का प्रदूषण स्तर निर्धारित मानक से अधिक पाया जाएगा, उन गाड़ियों के वाहन स्वामियों के खिलाफ मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से लागू किए नए मोटर व्हीकल एक्ट में प्रावधान है कि जिन गाड़ियों द्वारा निर्धारित मानकों से अधिक प्रदूषण फैलाया जा रहा, उन पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए।