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Dehradun News: घर-परिवार के साथ अब सेहत भी है बेहद जरूरी
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IIयोगा सेंटर और जिम में 70 से 80 प्रतिशत हैं महिलाएं
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Iदून की महिलाएं अब अपने स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग और जागरूक हो गई हैं। जहां पहले महिलाएं पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों में उलझकर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती थीं, वहीं अब वे खुद के लिए समय निकालते हुए फिटनेस को जीवनशैली का अहम हिस्सा बना रही हैं। शहर के 200 से भी अधिक योगा और जुंबा सेंटर्स में बीते पांच सालों में महिलाओं की भागीदारी 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वहीं जिम में भी महिलाओं की उपस्थिति में बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह सकारात्मक बदलाव दर्शाता है कि महिलाएं अब अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही हैं।
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Iयोग और जुंबा ट्रेनर पल्लवी गुप्ता बताती हैं कि बीते पांच सालों में उनके सेंटर में आने वाली महिलाओं में 70 फीसदी बढ़ोतरी देखने को मिली है। बताया, जहां पहले गिनी-चुनी महिलाएं सिर्फ किसी बीमारी के होने पर योग प्रशिक्षण लेती थीं। वहीं अब महिलाएं योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बता रही हैं। इनमें दफ्तर जाने वाली महिलाओं के साथ गृहणियां भी शामिल हैं। बताया कि बीते दो से तीन सालों में बुजुर्ग महिलाओं ने भी योग को अपनाया है। उन्होंने बताया महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति इस कदर जागरूक हैं कि जो किन्हीं कारणवश सुबह के योग सेशन में शामिल नहीं हो पाती उनके लिए शाम को अलग सेशन चलाए जा रहे हैं। इसी के साथ भूूतपूर्व मिस्टर उत्तराखंड और प्रसिद्ध फिटनेस ट्रेनर प्रशांत लामा बताते हैं कि बीते पांच सालों में जिम में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी हैं। बताया अब जिम में भी पुरुषों से ज्यादा महिलाएं है, जोकि पुरुषों से अधिक नियमित तौर पर जिम आती हैं। यह बदलाव महिलाओं की आत्मनिर्भरता, जागरूकता और आत्म-देखभाल की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।I
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IIयोगा सेंटर और जिम में 70 से 80 प्रतिशत हैं महिलाएं
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Iदून की महिलाएं अब अपने स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग और जागरूक हो गई हैं। जहां पहले महिलाएं पारिवारिक और पेशेवर जिम्मेदारियों में उलझकर अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती थीं, वहीं अब वे खुद के लिए समय निकालते हुए फिटनेस को जीवनशैली का अहम हिस्सा बना रही हैं। शहर के 200 से भी अधिक योगा और जुंबा सेंटर्स में बीते पांच सालों में महिलाओं की भागीदारी 80 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। वहीं जिम में भी महिलाओं की उपस्थिति में बीते कुछ वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह सकारात्मक बदलाव दर्शाता है कि महिलाएं अब अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही हैं।
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Iयोग और जुंबा ट्रेनर पल्लवी गुप्ता बताती हैं कि बीते पांच सालों में उनके सेंटर में आने वाली महिलाओं में 70 फीसदी बढ़ोतरी देखने को मिली है। बताया, जहां पहले गिनी-चुनी महिलाएं सिर्फ किसी बीमारी के होने पर योग प्रशिक्षण लेती थीं। वहीं अब महिलाएं योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बता रही हैं। इनमें दफ्तर जाने वाली महिलाओं के साथ गृहणियां भी शामिल हैं। बताया कि बीते दो से तीन सालों में बुजुर्ग महिलाओं ने भी योग को अपनाया है। उन्होंने बताया महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति इस कदर जागरूक हैं कि जो किन्हीं कारणवश सुबह के योग सेशन में शामिल नहीं हो पाती उनके लिए शाम को अलग सेशन चलाए जा रहे हैं। इसी के साथ भूूतपूर्व मिस्टर उत्तराखंड और प्रसिद्ध फिटनेस ट्रेनर प्रशांत लामा बताते हैं कि बीते पांच सालों में जिम में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी हैं। बताया अब जिम में भी पुरुषों से ज्यादा महिलाएं है, जोकि पुरुषों से अधिक नियमित तौर पर जिम आती हैं। यह बदलाव महिलाओं की आत्मनिर्भरता, जागरूकता और आत्म-देखभाल की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।I
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