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सरकार उदासीन लेकिन कांवड़ यात्रा को नोटिफिकेशन की दरकार
हेमवती नंदन भट्ट/ अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Fri, 07 Jul 2017 12:42 PM IST
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kanwar yatra
- फोटो : file photo
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उत्तराखंड के चारों धामों से लगभग दोगुने से अधिक श्रद्धालुओं की आमद वाली नीलकंठ कांवड़ यात्रा की व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार लगातार उदासीन रवैया अपनाए हुए है। हर साल महज श्रावण मास में 40 लाख शिवभक्तों की आमद वाले श्रावण मेला अभी तक नोटिफाइड नहीं किया जा सका है। जबकि इस यात्रा मेले के सापेक्ष श्रद्धालुओं की कम आमद वाले कई मेले-यात्राएं नोटिफाइड की जा चुकी हैं।
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पौराणिक नीलकंठ धाम को ख्याति की दृष्टि से उत्तराखंड का पांचवां जबकि श्रद्धालुओं की आमद के लिहाज से पहला धाम माना जाता है। बावजूद इसके मेला क्षेत्र में यात्री सुविधाओं के नाम पर स्थायी तो दूर अस्थायी व्यवस्थाएं तक नहीं हैं। सरकार और प्रशासन लाखों यात्रियों की आमद वाले श्रावण मेले के लिए फौरी तौर पर भी मूलभूत सुविधाएं जुटाने के लिए कोई वित्तीय मदद नहीं करता।
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कांवड़ मेला क्षेत्र में यह हैं अव्यवस्थाएं
-तीर्थनगरी ऋषिकेश से नीलकंठ धाम जाने वाले एकमात्र यातायात मार्ग का डामरीकरण डेढ़ दशक से नहीं हो पाया है। उक्त मार्ग वाहनों के आवागमन के लिहाज से पीडब्ल्यूडी के मानकों के अनुसार पूरी तरह से दुरुस्त नहीं है।
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-नीलकंठ में यात्रियों के ठहरने के लिए कोई सरकारी इंतजाम नहीं हैं। निजीतौर पर किए गए इंतजाम भी नाकाफी।
-मेला क्षेत्र में पथ प्रकाश की व्यवस्था नहीं है, जबकि श्रावण मास की यात्रा और महाशिवरात्रि पर्व पर यहां यात्रा दिन-रात चलती है।
-लक्ष्मण झूला से पीपलकोटी तक कहीं कोई पेयजल स्टैंडपोस्ट नहीं।
-नीलकंठ मंदिर के आसपास और लगभग नौ किमी. पैदलमार्ग पर पेयजल पोस्ट हैं, लेकिन जलापूर्ति सुचारू नहीं होती।
-यातायात और पैदलमार्ग पर स्थायी शौचालय/यूरीनल और सफाई इंतजाम नहीं। खुले में शौच से फैलती है गंदगी।
-करीब 8.5 किमी. स्वर्गाश्रम-नीलकंठ पैदलमार्ग पर पथ प्रकाश और सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। राजाजी नेशनल टाइगर रिजर्व पार्क क्षेत्र में करीब सात किमी. का पैदल मार्ग घना जंगल व हाथी, गुलदार बाहुल्य है।
श्रावण मास में कब कितने तीर्थयात्री आए
2010- 21,86800
2011- 16,50050
2012- 31,23500
2013- पांच लाख (उत्तराखंड में जलप्रलय वर्ष)
2014- 23 लाख (मेला क्षेत्र में आपदा वर्ष)
2015- 37 लाख
2016- 44 लाख
2017- 45-50 लाख यात्रियों की आमद का अनुमान
क्या कहते हैं लोग
नीलकंठ मंदिर समिति के सचिव धन सिंह राणा, सामाजिक कार्यकर्ता डा. नारायण सिंह रावत, अवनीश नौटियाल, सत्यपाल सिंह राणा का कहना है कि सरकार और प्रशासन मेले की व्यवस्थाओं के प्रति गंभीर नहीं है। वर्षों से मेले के नोटिफिकेशन और व्यवस्थाओं के लिए फंडिंग की मांग की जा चुकी है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।
वास्तव में लाखों श्रद्धालुओं वाले कांवड़ मेले की व्यवस्थाएं जुटाने के लिए मेले को नोटिफाइड किया जाना जरूरी है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से शासन को शीघ्र प्रस्ताव भेजकर सिफारिश की जाएगी।
- सुनील कुमार, जिलाधिकारी, पौड़ी गढ़वाल