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कार्यक्रम मिल रहे न पिछला भुगतान, कलाकार परेशान
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राजनीतिक हो या फिर सामाजिक समारोह। हर आयोजन में कलाकारों की मौजूदगी समारोह को दिलचस्प बनाती है। मनोरंजन करने वाले ऐसे कलाकार आज काम न होने से घर बैठे हैं। कोरोना के कारण बीते साल से कलाकारों के सामने आजीविका का संकट है। सबसे अधिक प्रभावित ऐसे कलाकार हैं, जिनके रोजगार का साधन ही रंगमंच है। वहीं तमाम कलाकारों का कोरोना से पहले किए गए कार्यक्रमों का भुगतान बाकी है।
वर्तमान में अब सब कुछ अनलॉक हो चुका है। धीरे-धीरे सभी तरह के आयोजन भी शुरू हो गए हैं, लेकिन कलाकार अभी भी घर बैठे हैं। विभाग की ओर से कलाकारों को कोई कार्यक्रम नहीं दिए जा रहे हैं। रंगकर्मी एवं हिमालय संस्कृति केंद्र के प्रेम पंचोली का कहना है कि उनके समूह से 20 कलाकार जुड़े है। इन सभी की रोजी-रोटी का साधन यही है। कलाकारों के पास काम नहीं होने से वह परेशान हैं। बतौर पंचोली मेरे साथ जुड़े दूर-दराज के कलाकारों के लगातार काम के लिए फोन आ रहे हैं, लेकिन जब विभाग की ओर से काम दिया ही नहीं जा रहा तो इन कलाकारों की मदद कैसे कर पाएंगे। कोरोना से पहले किए गए कार्यक्रमों का भुगतान भी कलाकारों को नहीं मिला है। कलाकार दिनेश भारती और सुनील कुमार ने बताया कि विभाग और सरकार को अब कलाकारों के बारे में भी सोचना चाहिए। लोक कलाओं और संस्कृति का संरक्षण कर रहे कलाकारों के सामने खुद के जीवन का संकट है। गायिका अंबिका चौहान ने कहा कि प्रदेश में कई कलाकार आज भी विभिन्न कलाओं के माध्यम से पारिवारिक जीवन-यापन और भरण-पोषण के लिए संघर्षरत हैं। आज भी कलाकार अपने मान-सम्मान के लिए तरस रहा है।
कालसी के कलाकारों के लिए संकट
रंगकर्मी व लेखक प्रेम पंचोली ने कालसी के रवाण गांव का जिक्र करते हुए बताया इस गांव के लोगों केवल ढोल, हुड़का, लोक नृत्य करना ही जानते हैं। उनकी रोजी रोटी का साधन मात्र उनकी कला ही है। इस वक्त यह कलाकार जिस संकट से जूझ रहे रहे उनकी पीड़ा वही समझ सकते हैं। इसी से इन लोगों को घर चलता है।
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वर्तमान में अब सब कुछ अनलॉक हो चुका है। धीरे-धीरे सभी तरह के आयोजन भी शुरू हो गए हैं, लेकिन कलाकार अभी भी घर बैठे हैं। विभाग की ओर से कलाकारों को कोई कार्यक्रम नहीं दिए जा रहे हैं। रंगकर्मी एवं हिमालय संस्कृति केंद्र के प्रेम पंचोली का कहना है कि उनके समूह से 20 कलाकार जुड़े है। इन सभी की रोजी-रोटी का साधन यही है। कलाकारों के पास काम नहीं होने से वह परेशान हैं। बतौर पंचोली मेरे साथ जुड़े दूर-दराज के कलाकारों के लगातार काम के लिए फोन आ रहे हैं, लेकिन जब विभाग की ओर से काम दिया ही नहीं जा रहा तो इन कलाकारों की मदद कैसे कर पाएंगे। कोरोना से पहले किए गए कार्यक्रमों का भुगतान भी कलाकारों को नहीं मिला है। कलाकार दिनेश भारती और सुनील कुमार ने बताया कि विभाग और सरकार को अब कलाकारों के बारे में भी सोचना चाहिए। लोक कलाओं और संस्कृति का संरक्षण कर रहे कलाकारों के सामने खुद के जीवन का संकट है। गायिका अंबिका चौहान ने कहा कि प्रदेश में कई कलाकार आज भी विभिन्न कलाओं के माध्यम से पारिवारिक जीवन-यापन और भरण-पोषण के लिए संघर्षरत हैं। आज भी कलाकार अपने मान-सम्मान के लिए तरस रहा है।
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कालसी के कलाकारों के लिए संकट
रंगकर्मी व लेखक प्रेम पंचोली ने कालसी के रवाण गांव का जिक्र करते हुए बताया इस गांव के लोगों केवल ढोल, हुड़का, लोक नृत्य करना ही जानते हैं। उनकी रोजी रोटी का साधन मात्र उनकी कला ही है। इस वक्त यह कलाकार जिस संकट से जूझ रहे रहे उनकी पीड़ा वही समझ सकते हैं। इसी से इन लोगों को घर चलता है।
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