क्रशर नहीं कृषि ही होगी मलेथा की पहचान
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पहाड़ पर कृषि क्रांति का अग्रदूत माने जाने वाले मलेथा गांव में स्टोन क्रशरों की मंजूरी के खिलाफ किसानों का आंदोलन आखिरकार रंग लाया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा है कि मलेथा गांव में स्टोन क्रशर नहीं लगेगा। अगर लगना भी होगा तो गांव के आसपास जगह तलाश की जाएगी।
रविवार को यहां पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलाधिकारी युगलकिशोर पंत को इस मामले की समीक्षा के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
आंदोलनकारी से मिले सीएम
शनिवार को हुई बस दुर्घटना के घायलों को देखने बेस अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी बात कहने के लिए मलेथावासी जुट गए थे। डेढ़ घंटे इंतजार के बाद भी मंत्री प्रसाद नैथानी के आग्रह और आंदोलनकारियों के रोष को देखते हुए आखिर एक आंदोलनकारी देब सिंह को सीएम से मिलने की अनुमति मिली।
देब सिंह ने मलेथा में किसी भी हालत में क्रशर नहीं लगने देने की मुख्यमंत्री से गुजारिश की और मांग न माने जाने पर आत्मदाह की चेतावनी दी। मुख्यमंत्री ने उन्हें क्रशर न लगाए जाने को लेकर आश्वस्त किया।
गढ़वाल विवि छात्र संघ ने भी दिया समर्थन
श्रीनगर संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष अनिल स्वामी, मलेथा के ग्राम प्रधान शूरवीर सिंह बिष्ट, महिला अध्यक्ष विमला देवी, पूर्व ग्राम प्रधान रघुवीर सिंह समेत करीब 10 आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से वार्ता की कोशिश की, लेकिन मुख्यमंत्री मुस्कुराकर चल दिए।
मलेथा में क्रशर के विरोध में चल रहे आंदोलन को समर्थन देने के लिए रविवार को गढ़वाल विवि छात्र संघ के पदाधिकारी भी पहुंचे। इस मौके पर छात्र नेताओं ने भी क्रशर को मलेथा से हटाए जाने की मांग की।