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नर्स हड़ताल : नो वर्क नो पे है सिर्फ दिखावा

Thu, 09 Jan 2014 11:11 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 09 Jan 2014 11:11 PM IST
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no work no pay ineffective

सरकार या कोर्ट चाहे जो कह लें पर आंकड़े बताते हैं कि कर्मचारियों को नो वर्क नो पे लागू कर उनको आंदोलन से वापस बुलाने के आदेश अब तक कारगर साबित नहीं हुए हैं।

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अधिकांश मामलों में नो वर्क नो पे लागू करने के बाद जब आंदोलनरत कर्मचारी संगठनों से समझौता होता है तो वेतन काटने के नाम पर हर बार उसे उपार्जित अवकाश में समायोजित कर देने पर सहमति के बनी है।
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सरकार नहीं लागू करती
मिनिस्टीरियल कर्मचारियों की आरक्षण के मसले को लेकर हुई हड़ताल के दौरान सरकार ने 'नो वर्क नो पे' का शासनादेश कैबिनेट की बैठक के बाद लागू किया था। बाद में कर्मचारियों उपार्जित अवकाश से वेतन कटौती को समायोजित कर दिया गया।


पहले भी हो चुका है ऐसा
राज्य कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान भी सरकार ने नो वर्क नो पे का आदेश लागू करने की बात की थी, लेकिन बाद में इन कर्मचारियों के काटा गया वेतन भी उपार्जित अवकाश में समायोजित कर दिया गया।

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कई दिन चले फार्मासिस्टों के कार्य बहिष्कार और फिर हड़ताल पर नो वर्क नो पे के आदेश जारी हुए, लेकिन बाद में तीन दिन का काटा वेतन उपार्जित अवकाश में समायोजित कर दिया गया।

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