फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   no toilet but cm giving Open defecation free congratulation

उत्तराखंड: यहां शौचालय हैं नहीं और सीएम दे रहे खुले में शौच मुक्त होने की बधाई

Sun, 16 Dec 2018 11:46 AM IST
अलका त्यागी पंकज मेहरा, अमर उजाला, मौलेखाल (अल्मोड़ा)
पंकज मेहरा, अमर उजाला, मौलेखाल (अल्मोड़ा) Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 16 Dec 2018 11:46 AM IST
विज्ञापन
no toilet but cm giving Open defecation free congratulation
त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : google

राज्य के खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) होने के दावे की पोल खोल रहा है सल्ट विकासखंड का भ्याड़ी गांव।

विज्ञापन


गांव में शौचालय विहीन परिवार की एक महिला के नाम डाक के माध्यम से मुख्यमंत्री के हस्ताक्षरयुक्त बधाई संदेश मिलने से परिवार हैरान है।

सरकार ओडीएफ की हकीकत जाने बगैर ही ग्रामीणों को बधाई संदेश भेजकर अपनी पीठ थपथपा रही है जबकि सच्चाई यह है कि इस गांव में 30 परिवार शौचालय विहीन हैं। गांव के मुख्य मार्ग गंदगी से पटे हैं। गांव में सार्वजनिक शौचालय, स्नानागार नहीं है। कूड़ा निस्तारण के लिए कूड़ेदान तक नहीं हैं। शौच के लिए ग्रामीण 500 मीटर दूर जाते हैं।              

अमर उजाला टीम ने भ्याड़ी गांव का मुआयना किया तो स्वच्छ भारत अभियान की सच्चाई सामने आई। भ्याड़ी सड़क मार्ग से 13 किमी दूरी पर स्थित हैं। इस गांव में कुल 200 परिवार रहते हैं। इसमें से 30 परिवार अनुसूचित जाति के हैं।

गांव के वीरेंद्र कुमार, मनोज कुमार, विनोद कुमार, बिहारी लाल, दयाल राम, राधा देवी, कमला देवी, देवकी देवी, प्रेम बल्लभ, मोहन सिंह, सुंदरी देवी, शांति देवी, राम दत्त समेत कुल 30 परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। इनमें अनुसूचित जाति के परिवारों की संख्या ज्यादा है।

कमला देवी ने बताया कि तीन माह पहले मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की ओर से उन्हें शौचालय बनाने का बधाई संदेश डाक से मिला तो वह अचंभित रह गईं। उन्होंने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए उसे न तो 12 हजार रुपये मिले और न ही उसके पास शौचालय है। ऐसे में मुख्यमंत्री से बधाई संदेश का मिलना ओडीएफ में गड़बड़ी का संकेत देता है। कमला देवी ने बताया कि इस तरह के बधाई संदेश कई अन्य परिवारों को भी मिले हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

राधा देवी ने बताया कि स्वजल की ओर से उसे तीन माह पहले प्लास्टिक का शौचालय दिया गया था। तब से वह खेत में ही पड़ा है। विभाग के कर्मचारी इसे फिट करने नहीं आए। वीरेंद्र कुमार ने बताया कि वे चार भाई पहले संयुक्त परिवार में रहते थे। अब अलग-अलग रहते हैं। चारों में से किसी को भी शौचालय के लिए धनराशि नहीं दी गई और ना ही शौचालय उपलब्ध कराया गया।

प्रेम बल्लभ ने बताया कि उसके पास भी शौचालय नहीं है। उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी आवंटित नहीं हुआ। भ्याड़ी गांव में न तो सार्वजनिक शौचालय है और ना ही स्नानागार है। शादी समेत बड़े आयोजन में पहुंचने वाले मेहमानों को भी खुले स्थान पर शाच करना पड़ता है। खासकर महिलाओं को भारी दिक्कतें होती हैं। गांव के रास्तों में शौच करने से गंदगी हो रही है। प्रमोद मनराल ने बताया कि गांव में पानी की समस्या है।    

विज्ञापन

सरकारी स्कूलों में भी बंद पड़े हैं शौचालय      

भ्याडी गांव में एक जूनियर हाईस्कूल, दो प्राथमिक विद्यालय हैं। जूनियर हाईस्कूल में सार्वजनिक शौचालय है। पानी की समस्या के कारण शौचालय में काफी गंदगी रहती है। प्राथमिक विद्यालय भ्याड़ी में शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं। वर्तमान में यह बंद पड़े हैं। इस कारण विद्यार्थी खुले स्थान में शौच करते हैं। विद्यालय में कूड़ादान भी नहीं है। खुले स्थान पर ही कूड़ा निस्तारित हो रहा है। तीनों विद्यालयों में सुरक्षा दीवार भी नहीं है।

गांव के 17 लोगों को शौचालय का पैसा नहीं मिला है। 13 परिवारों के शौचालयों के लिए धनराशि पहुंच चुकी है। कई परिवार 12 हजार रुपये में शौचालय निर्माण के लिए तैयार नहीं हैं। 17 लोगों को शौचालय के लिए धनराशि आंवटित करने के लिए स्वजल से मांग की गई है।
- गणेशी देवी, प्रधान भ्याड़ी 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed