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बिना कर्मचारियों के चल रहा पर्यटन विभाग
अमर उजाला, गोपेश्वर
Updated Thu, 19 Dec 2013 05:04 PM IST
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पर्यटन प्रदेश का राग अलापने वाले राज्य में स्थिति यह है कि औली और फूलों की घाटी सहित कई विश्वविख्यात पर्यटक स्थल वाले चमोली जिले में पर्यटन विभाग में कोई कर्मचारी ही नहीं है। ऐसे में सरकार की पर्यटन के विकास की गंभीरता समझी जा सकती है।
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दूसरे विभाग के भरोसे चल रहा काम
जिले में दो वर्षों से जिला पर्यटन अधिकारी का पद रिक्त है। साहसिक खेल अधिकारी जोशीमठ पर्यटन अधिकारी का जिम्मा भी संभाले हुए हैं। विभाग में स्वीकृत सात पदों के सापेक्ष केवल टंकण लिपिक ही कार्यरत है।
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पीआरडी के कुछ स्वयंसेवकों के भरोसे पर्यटन विभाग में काम चलाया जा रहा है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना, पौराणिक मठ-मंदिरों के सुंदरीकरण के साथ ही विभाग के पर्यटन स्थलों को सजाने संवारने की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं।
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स्थायी अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों से आए प्रस्ताव अलमारी से बाहर नहीं आ पाते हैं।
नहीं है कोई व्यवस्था
जिला पर्यटन विभाग की ओर से उर्गम, कागभुषंडी, तपोवन, बेनीताल, वेदनी बुग्याल ऐसे पर्यटक स्थल हैं, जहां पर्यटक तो उमड़ते हैं, लेकिन इन स्थलों तक पहुंचने के लिए न तो पैदल ट्रैक हैं और ना ही यहां ठहरने की कोई व्यवस्था है।
अनुसूया माता मंदिर समेत पोखरी, घाट, कर्णप्रयाग और देवाल क्षेत्रों में कई पौराणिक मठ-मंदिर संरक्षण के लिए झटपटा रहे हैं।
विभाग में पदों की वर्तमान स्थिति
जिला पर्यटन अधिकारी - रिक्त
स्वागत अधिकारी - रिक्त
प्रधान लिपिक - रिक्त
वरिष्ट लिपिक - रिक्त
टंकण लिपिक - कार्यरत
चालक - रिक्त
चतुर्थ श्रेणी - रिक्त