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खतरे से घिरी है हजारों मजदूरों की जान
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 27 Mar 2014 10:17 AM IST
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देहरादून शहर में हजारों की संख्या में श्रमिक भवन निर्माण क्षेत्र में कार्यरत हैं। लेकिन कार्य स्थल पर उनकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जाते हैं।
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शासन प्रशासन बना रहता है मूक दर्शक
परिवार का पेट पालने के लिए तमाम खतरों के बीच श्रमिक काम करते हैं। कार्य स्थल पर यदि किसी हादसे में मजदूर घायल हो जाते हैं उनका इलाज नहीं कराया जाता है।
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यदि काम करते समय किसी दुर्घटना में मजदूर की मौत हो जाती है तो उसके परिजनों का मुआवजा भी नहीं दिया जाता है। शासन प्रशासन भी इस दिशा में मूक दर्शक बना रहता है।
नवजवान उत्तराखंड सभा ने जिलाधिकारी बीवीआरसी पुरुषोत्तम को एक पत्र लिखकर शहर में निर्माणकार्य के दौरान हो रही मजदूरों की मौत पर चिंता जताई।
भवन निर्माण के दौरान हो रही मजदूरों की मौत
सभा ने मांग की कि द बिल्डिंग एंड अंडर कंस्ट्रक्शन वर्कर एक्ट-1996 को सख्ती से लागू किया जाए। सभा के अध्यक्ष पंकज क्षेत्री ने बताया कि राजधानी में भवन निर्माण के दौरान लगातार मजदूरों की मौत हो रही है। लेकिन शासन प्रशासन मूक बना हुआ है।
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बता दें कि राजपुर डायवर्जन पर एक निजी अस्पताल में दो सफाई कर्मचारियों की टंकी साफ करने के दौरान मौत हो गई। इस मामले में कानून संमत कार्रवाई नहीं की गई।
इसी तरह एक मजदूर मंगलवार को जीएमएस रोड पर स्थित एक टावर से गिरकर मर गया। अब उसके परिजन मुआवजे के लिए भटक रहे हैं। पंकज बताते हैं कि यदि कंस्ट्रक्शन एक्ट सख्ती से लागू किया जाए तो हजारों मजदूरों को राहत मिलेगी।
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एक्ट के तहत सभी राज्यों में बोर्ड के गठन का प्रावधान है, जो मजदूरों की हितों की रक्षा करेगा। लेकिन राज्य में इसका भी गठन नहीं किया गया है।
कहा कि हर साल करोड़ों रुपयों की लागत से भवन निर्माण होते हैं, लेकिन इनसे दो प्रतिशत सैस नहीं वसूला जाता है। यदि सैस वसूला जाए तो मजदूरों का भविष्य सुरक्षित हो जाए।