हिंदू धर्म के बच्चों के शव दफनाने के लिए जगह नहीं
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प्रदेश में हिंदू धर्म के बच्चों की असमय मौत पर शव दफनाने के लिए सुरक्षित जगह निर्धारित नहीं होने पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने गंभीरता से लिया है। पीएमओ ने इस बारे में उत्तराखंड के मुख्य सचिव को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इससे पहले मानवाधिकार आयोग भी इस मामले पर राज्य सरकार से जवाब तलब कर चुकी है। दरअसल हिंदु बच्चों की मौत के बाद उनके शव को दफनाने की परंपरा रही है।
ह्यूमन राइट्स फोरम के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भूपेंद्र कुमार ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में शिकायत की थी कि हिंदू धर्म में छोटे बच्चों की मृत्यु के बाद उनके शव को दफनाकर अंतिम संस्कार की परंपरा है। पर उत्तराखंड के लगभग सभी शहरों में छोटे बच्चों के शव दफनाने की सुरक्षित जगह तय नहीं है।
लोग बच्चों के शव जंगल, नदी किनारे या अन्य सुनसान जगह पर दफनाते हैं। ऐसे में अक्सर जंगली जानवर इन शवों को नोंचते हैं।
मानवाधिकार आयोग भी जता चुका आश्चर्य
पीएमओ ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में शीघ्र जरूरी कार्रवाई कर शिकायतकर्ता को सूचित करें। साथ ही कार्रवाई की जानकारी पीएमओ के पोर्टल पर भी अपलोड करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
उत्तराखंड मानवाधिकार आयोग भी अब तक इस संवेदनशील मामले का समाधान नहीं होने पर आश्चर्य जता चुके हैं। मामले की गंभीरता देखते हुए आयोग ने छह जनवरी को दाखिल भूपेंद्र कुमार की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए थे कि सभी जिलों के डीएम हिंदू धर्म के बच्चों के शव दफनाने के लिए निश्चित क्षेत्र में सुरक्षित और समुचित जगहों की शीघ्र तलाश करें। आयोग में अगली सुनवाई आठ मार्च को होनी है।