कैबिनेट में उत्तराखंड की एंट्री में मोदी खुद बने रोड़ा!
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इंतजार का आज ग्यारहवां दिन था। लेकिन सभी सीटें देने वाले उत्तराखंड के हिस्से में सुकून देने वाला पल नहीं आया।
प्रदेश की जनता ने भाजपा की झोली में पांचों सीटें डाल दी लेकिन एक भी मंत्री नसीब नहीं हुआ। मोदी के सक्सेस प्लान 'मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सीमम गवर्नेंस' के चक्कर में फिलहाल उत्तराखंड को हाशिए पर डाल दिया गया।
प्रदेश में वृहद राजनीतिक पृष्ठभूमि और हाई प्रोफाईल वाले तीन पूर्व मुख्यमंत्री चुनाव जीते हैं, लेकिन किसी को कैबिनेट बर्थ पर जगर नहीं मिल सकी।
हाईप्रोफाईल नेताओं का भी नहीं लगा नंबर
केंद्रीय कैबिनेट में भागीदारी को लेकर सुबह ही भ्रम की स्थिति बन गई थी। लेकिन फिर भी शपथग्रहण समारोह से पहले इस बात पर किसी को यकीन नहीं हुआ कि उत्तराखंड के हाथ कुछ नहीं लगेगा।
राज्य में सात मई के बम्पर मतदान की मेहनत को 26 मई की शाम लूट ले गई। राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रहे बीसी खंडूड़ी पौड़ी से सांसद चुने गए। इससे पहले वह केंद्र में कैबिनेट मंत्री रहे और कई बार सांसद निर्वाचित हुए।
भगत सिंह कोश्यारी धुर कांग्रेसी सीट नैनीताल से 2.84 लाख के अंतर से जीते। राज्यसभा सदस्य हैं और कैबिनेट मंत्री के बाद एक बार मुख्यमंत्री भी रहे।
कोई फॉर्मूला नहीं आया काम
रमेश पोखरियाल निशंक हरिद्वार से मुख्यमंत्री की पत्नी रेणुका रावत को हराकर चुनाव जीते। यूपी के जमाने से कैबिनेट मंत्री रहे और राज्य के मुख्यमंत्री भी रहे।
लेकिन यह हाई प्रोफाईल और राजनीतिक पृष्ठभूमि यूनियन कैबिनेट में बर्थ दिलाने में काम नहीं आ सकी। मोदी की कैबिनेट में ऐसे कई राज्यमंत्री है जो कि पहली बार लोकसभा का चुनाव जीते है।
बीसी खंडूड़ी को कैबिनेट मंत्री के रूप में बर्थ मिलना तय माना जा रहा था। लेकिन जब उम्र फैक्टर हावी हुआ तो भगत सिंह कोश्यारी का नाम सबसे ऊपर आ गया।
भाजपा को होगा नुकसान
लेकिन जैसा आभास सुबह से हो रहा था शायद ही उत्तराखंड से किसी को मोदी कैबिनेट में जगह मिले, वहीं नतीजा शाम को सामने आया।
लेकिन यदि परिस्थितियों में कोई परिवर्तन नहीं हुआ तो यह भी तय है कि राज्य का राजनीतिक परिदृश्य भी बदलेगा। छोटा प्रदेश होने के कारण हर बात सीधे जनता में असर छोड़ती है।
अगले दो महीनों में कुछेक विधानसभा सीटों के उप-चुनाव होंगे, तब विरोधी दल इस मामले में चाबुक चला सकते है।
सीएम हरीश ने दी शुभकामनाएं
पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू होने वाली है, राज्य में काम बहुत थे। आचार संहिता से पहले कुछ लंबित काम निबटाने थे इसलिए दिल्ली नहीं जा सका। क्योंकि मेरी यही प्राथमिकता थी। मैंने नरेंद्र दामोदरदास मोदी को अपनी शुभकामनाएं भेज दी है।
-हरीश रावत, मुख्यमंत्री उत्तराखंड