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भूलकर भी इस हेल्पलाइन में फोन मत करना

Tue, 14 Jan 2014 09:45 AM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 14 Jan 2014 09:45 AM IST
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no help in women  helpline

देहरादून पुलिस महिला सुरक्षा सप्ताह मनाकर महिलाओं के प्रति संवेदनशील होने का दावा कर रही है, लेकिन वूमेन प्रोटेक्शन सेल और साइबर सेल के आंकड़े कुछ और ही कहानी कह रहे हैं।

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नवंबर से अब तक 61 मुकदमे दर्ज हुए, लेकिन गिरफ्तार हुए महज चार। ऐसे में दून की बेटियां कैसे विश्वास करे कि पुलिस उनके प्रति संवेदनशील है। दिल्ली में हुए गैंग रेप प्रकरण के बाद दून में भी वूमन प्रोटेक्शन सेल और साइबर सेल को मजबूत किया गया।
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हेल्पलाइन को हेल्प की दरकार
एसएसपी के आदेश पर लगभग छह माह पूर्व मेडिकल हेल्प लाइन बनाई गई थी। एसआई को इसका प्रभारी बनाया गया था। लेकिन न तो आज तक हेल्पलाइन में कोई शिकायत आई और ना ही प्रभारी महोदय कभी डॉक्टरों के पास गए। आलम यह तक है कि हेल्प लाइन के पास कोई नंबर भी नहीं है और न ही कोई वाहन।

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अधिकारियों ने दोनों ही अनुभागों को ताकीद की थी कि छोटे से छोटे मामले को भी गंभीरता से लें। पुलिस ने इन दोनों सेल का खूब प्रचार भी किया। नवंबर से 10 जनवरी तक वूमन प्रोटेक्शन सेल के पास 65 महिलाओं ने शिकायतें की।


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इनमें राह चलती लड़कियों के साथ छेड़छाड़, फब्तियां कसना, स्ट्रीट क्राइम जैसे गंभीर आरोप थे। पुलिस ने 60 शिकायतों पर मुकदमे दर्ज किए। लेकिन गिरफ्तार केवल चार ही मनचले हुए। यही हाल साइबर सेल का भी है।

मुकदमा दर्ज करने से मना कर देते हैं पीड़ित
32 शिकायतों में एक ही मुकदमा दर्ज हुआ। हालांकि साइबर सेल में तैनात कर्मचारियों का कहना है कि अधिकांश मामलों में पीड़ित ही मुकदमा दर्ज करने से मना कर देते हैं।

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एसएसपी केवल खुराना ने बताया कई बार ऐसा होता है युवती शिकायत तो कर देती है, लेकिन आरोपी कोई परिचित निकलने पर वह कदम पीछे खींच लेती है। साइबर सेल के पास अधिकांश मामले ऐसे ही आते है। हालांकि अगर क्राइम गंभीर है तो फिर आरोपित को गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश किया जाता है।

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