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उत्तराखंडः पहले आपदा की मार, अब सिस्टम की चोट
विपिन बनियाल/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:09 AM IST
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उत्तराखंड में आपदा प्रभावितों के लिए बडे़-बडे़ दावे, बडे़-बडे़ वायदे, लेकिन हकीकत कुछ और। रुद्रप्रयाग जिले में 12वीं कक्षा के बाद शिक्षा और रोजगार की व्यवस्था के लिए बनी योजना पर सरकारी मशीनरी की बेहरमी सामने आ रही है। मार्च में ये वो वक्त है, जबकि आपदा प्रभावित बच्चों को इस योजना के लिए चिह्नित कर लिया जाना चाहिए था।
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बजट भी रुद्रप्रयाग के कोषागार में पहुंच चुका है, लेकिन चिह्नित करने वाली कमेटी ही नहीं बन पाई है। शासन और प्रशासन के बीच अब भी चिट्ठी पत्री का खेल चल रहा है। समझा जा सकता है कि इस संवेदनशील मसले पर सरकारी मशीनरी कितनी संजीदा है।
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प्रभावित बच्चों की योजना-सूरत-ए-हाल
30 नवंबर 2016 को सीएम हरीश रावत ने किया था योजना का एलान
12 वीं कक्षा से आगे की शिक्षा के लिए मिलेगी बच्चों को सहायता
01 करोड़ का कारपस फंड बनाया है हरीश रावत सरकार ने
धाद ने दिया था सरकार को सुझाव
पहाड़ के सरोकार के लिए कार्यरत धाद संस्था ने हरीश रावत सरकार को आपदा प्रभावित बच्चों की मदद के लिए सुझाव दिया था। दरअसल, धाद संस्था पिछले कुछ समय से एक से 12 वीं तक के जरूरमंद बच्चों की सहायता के लिए कार्यक्रम चला रही है। सीएम हरीश रावत से मुलाकात में धाद ने कहा था कि वह 12वीं से ऊपर की कक्षा के लिए सहायता नहीं कर सकती। यह काम सरकार को करना चाहिए। इस सुझाव को सरकार ने मान लिया और योजना में धाद की भूमिका भी सुनिश्चित कर दी।
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योजना के क्रियान्वयन के संबंध में सबसे पहले कमेटी का गठन किया जाना है। कमेटी गठन की प्रक्रिया और तमाम सारी बातों को लेकर एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस दौरान विधानसभा चुनाव की व्यस्तता के कारण इस संबंध में बहुत ज्यादा काम नहीं हुआ है। चुनाव आचार संहिता समाप्त होते ही इस संबंध में तेजी से काम किया जाएगा।
- रंजना, डीएम, रुद्रप्रयाग
हम अपने स्तर पर पहले से प्रभावित बच्चों के बीच काम कर रहे हैं। हमारी पहल पर ही सरकार इस योजना को लाई है। मगर चुनाव और अन्य कारणों से योजना के क्रियान्वयन में देर हो गई है, जबकि प्रभावित बच्चों के कैरियर के लिहाज से ये समय बेहद अहम है, क्योंकि जल्द ही नया सत्र शुरू होने जा रहा है। इस संबंध में तुरंत कार्रवाई जरूरी है।
- तन्मय ममगांई, सचिव, धाद संस्था