पलायन रोकने के लिए नीति आयोग ने उत्तराखंड सरकार से मांगा प्रस्ताव
- नियोजन विभाग नीति आयोग को दस्तावेज तैयार कर भेजेगा
- एमएसएमई और सेटेलाइट टाउनशिप पर फोकस का सुझाव
- आयोग को विभागों ने बताई समस्याएं, प्रस्तुत की कार्ययोजना
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नीति आयोग ने अब प्रदेश सरकार से कहा है कि वह स्पष्ट बताए कि ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन को रोकने के लिए केंद्र सरकार की किन नीतियों में बदलाव किया जाना है और किस तरह की वित्तीय मदद की दरकार केंद्र से राज्य को है।
इसके लिए प्रदेश का नियोजन विभाग नीति आयोग को महत्वपूर्ण दस बिंदुओं पर प्रस्ताव तैयार कर भेजेगा। सचिवालय में बृहस्पतिवार को नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की मौजूदगी में हुई बैठक में विभागों ने आयोग को पलायन रोकने की योजनाओं और इसमें आड़े आ रही समस्याओं से अवगत कराया।
बैठक के बाद मीडिया से मुखातिब प्रोफेसर रमेश चंद ने कहा कि राज्य की ओर से यह स्पष्ट कहा गया है कि पलायन को रोकने के लिए धन की कमी है। यह पाया गया कि पलायन को रोकने के लिए लघु, कुटीर एवं मध्यम उद्योग प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। आयोग ने लैंड लीजिंग कानून में परिवर्तन कर कांटेक्ट फार्मिंग को बढ़ाने पर जोर दिया।
आयोग ने यह भी कहा कि प्रदेश में सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जाए, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को शहरों की ओर न आना पड़े। आयोग ने सीमांत क्षेत्रों में पलायन पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दिन भर हुई बैठक में पर्यटन, गाम्य विकास, वन आदि महकमों ने आयोग के सामने पलायन को रोकने की विभागीय कार्ययोजनाओं की प्रस्तुति की और आयोग के सामने इन योजनाओं को लागू करने में आ रही समस्याओं का जिक्र किया।
प्रभारी मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने बताया कि बैठक के आधार पर नियोजन विभाग महत्वपूर्ण बिंदुओं पर दस्तावेज तैयार कर नीति आयोग को भेजेगा। नीति आयोग इस दस्तावेज के आधार पर केंद्र सरकार को उत्तराखंड और अन्य हिमालयी राज्यों से संबंधित सुझाव देगा।
हिमाचल का भी होगा अध्ययन
पहाड़ों से हो रहे पलायन का अध्ययन करने के लिए उत्तराखंड के अधिकारियों की टीम हिमाचल भी जाएगी। बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि भौगोलिक समानता वाला राज्य होने के बाद भी हिमाचल में पलायन कम है। अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश के मुताबिक हिमाचल में वन और पर्यावरण कानूनों के प्रभावी होने से पहले विकास योजनाओं की शुरूआत हो गई थी।
मिश्रित खेती पर भी जोर
पलायन को रोकने के लिए मिश्रित खेती को अपनाने पर भी जोर दिया गया। एसीएस ने कहा कि विमर्श में यह सामने आया कि उद्योग, उद्यान, कृषि सहित अन्य संबंधित विभागों को समन्वय बनाकर काम करना होगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के दायरे में 250 से कम आबादी वाले गांवों को भी शामिल करने का आग्रह आयोग से किया गया है।
नीति आयोग को बताया गया है कि प्रदेश में 90 प्रतिशत खेती बारिश आधारित है और राज्य आपदा प्रभावी है। ऐसे में कृषि में राज्य को केंद्र से अधिक सहयोग मिलना चाहिए और आपदा के मानकों में ढील दी जानी चाहिए। यह भी सुझाव दिया गया कि पर्वतीय क्षेत्रों में क्षमता विकास को राष्ट्रीय आजीविका कार्यक्रम से जोड़ा जाए।
- सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री