{"_id":"58fad9494f1c1b8f338b4fb7","slug":"ninty-five-childs-from-uttarakhand-could-not-get-education","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड के 95 हजार बच्चों की शिक्षा को केंद्र का झटका ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड के 95 हजार बच्चों की शिक्षा को केंद्र का झटका
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 22 Apr 2017 09:47 AM IST
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उत्तराखंड में डबल इंजन सरकार है। बावजूद इसके आरटीई के तहत पब्लिक स्कूलों में कोटे की 25 फीसदी सीटों पर एडमीशन पाने वाले 95 हजार से अधिक बच्चों को इस साल भी शिक्षा प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई है। प्रदेश सरकार को इसके लिए 91 करोड़ से अधिक की दरकार है। केंद्र से यदि यह धनराशि न मिली तो इसे राशि को राज्य सरकार को वहन करना होगा।
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प्रदेश में वर्ष 2011-12 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया गया। एक्ट के लागू होने से लेकर अब तक 95 हजार से अधिक गरीब और अपवंचित वर्ग के बच्चों को पब्लिक स्कूलों में कोटे की 25 फीसदी सीटों पर दाखिला दिया गया। इसमें वर्ष 2016-17 में प्रदेश के मान्यता प्राप्त 4169 पब्लिक स्कूलों में से 3922 स्कूलों में 19018 बच्चों को दाखिला दिया गया।
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जबकि इस साल भी बच्चों को आरटीई के तहत एडमीशन हो रहे हैं। नियमानुसार इन बच्चों की शिक्षा प्रतिपूर्ति (फीस एवं अन्य खर्च) का शत प्रतिशत केंद्र को वहन करना था, लेकिन केंद्र की ओर से प्रदेश को शिक्षा प्रतिपूर्ति नहीं मिल पाई है। शिक्षा प्रतिपूर्ति समय पर न मिलने से अब कई स्कूलों ने गरीबों के इन बच्चों को स्कूल से निकालना शुरू कर दिया है।
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इनके एडमीशन में भी यह स्कूल आनाकानी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा प्रतिपूर्ति के लिए समय-समय पर केंद्र को प्रस्ताव भेजे जाते रहे हैं, लेकिन केंद्र की ओर से न पिछले साल न ही इस वर्ष अब तक शिक्षा प्रतिपूर्ति मद में कोई बजट मिल पाया है।
आरटीई राज्य समन्वयक सुनील भट्ट ने बताया कि आरटीई के तहत शिक्षा प्रतिपूर्ति पर प्रदेश सरकार अब तक एक अरब 37 करोड़ 90 लाख रुपये वहन कर चुकी है। इसके लिए अभी 91 करोड़ रुपये की दरकार है, लेकिन न केंद्र से न ही राज्य सरकार से इस मद में कोई धनराशि मिल पाई है।