निकाय चुनाव 2018: लोकसभा चुनाव के लिए मतदाताओं ने भाजपा को चेताया, कांग्रेस को दिलासा
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विधानसभा चुनाव में अतुलनीय प्रदर्शन करने वाली भाजपा को अब लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है।
कुमाऊं मंडल के 36 निकायों में भाजपा शहरी क्षेत्र के करीब 33 प्रतिशत मतदाताओं को ही लुभा पाई। मत प्रतिशत के हिसाब से कांग्रेस का प्रदर्शन सत्ताधारी दल से बेहतर रहा। कांग्रेस ने इन निकायों में करीब 35 प्रतिशत वोट हासिल किए। क्षेत्रीय दल यूकेडी, बसपा और सपा को यह चुनाव आत्ममंथन के लिए मजबूर करेगा।
निकाय चुनाव को भाजपा ने गंभीरता से लेने का दावा किया था। लोकसभा चुनाव की पहली सीढ़ी मानकर सत्ताधारी दल ने निकाय चुनाव में संगठन से लेकर सरकार तक हाड़तोड़ मेहनत भी की। परिसीमन और आरक्षण तय करने में उसे सत्ता में होने का सुख भी मिला। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्रियों तक के दौरे, डबल इंजन की सरकार और सहकारिता चुनाव में बेहतरीन प्रदर्शन का सहारा भी भाजपा ने लिया।
कुमाऊं मंडल के रुद्रपुर और काशीपुर नगर निगम सहित 36 निकायों के अध्यक्ष पदों पर भाजपा कुल वोट का 33 प्रतिशत हासिल करने में सफल रही। रुद्रपुर नगर निगम में ही भाजपा का वोट प्रतिशत करीब 47 रहा। रुद्रपुर में मिली जीत ने ही भाजपा को कुमाऊं में कुछ हद तक संभाला भी। 29 निकायों में उसे कुल मिलाकर 27 प्रतिशत वोट ही मिल पाए।
इस हिसाब से कांग्रेस अपनी पीठ थपथपा सकती है। विधानसभा चुनाव के बाद सहकारिता चुनाव में बुरी तरह से हार का सामना करने वाली कांग्रेस ने कुमाऊं मंडल के 36 निकायों में करीब 35 प्रतिशत वोट हासिल किए। कांग्रेस खुद भी इस चुनाव को लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की कोशिश के रूप में देख रही थी। 29 निकायों में कांग्रेस ने करीब 28 प्रतिशत मतदाताओं का विश्वास जीतने में कामयाबी पाई।
रुद्रपुर नगर निगम में उसे कुल 40 प्रतिशत वोट मिले और निगम में सात प्रतिशत के वोटों के अंतर उस पर भारी पड़ा। उसे संभाला किच्छा और काशीपुर ने। यूकेडी, सपा, बसपा और अन्य दलों को यह चुनाव आत्ममंथन का संकेत भी दे गया है। यूकेडी ने नैनीताल की एकमात्र सीट गंवाकर अपने गिरते ग्राफ की बानगी पेश की। बसपा को जसपुर में जीत का स्वाद मिला और सपा खाता तक नहीं खोल पाई।