निकाय चुनाव 2018: यहां ‘कमल’को कुम्हलाने में जुटे असंतुष्ट, निकाला ये तरीका
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निकाय चुनाव में भाजपा के लिए सिरदर्द बने असंतुष्ट पार्टी प्रत्याशी के लिए नित नई बाधा खड़ी कर रहे हैं।
असंतुष्टों का एक ही मकसद है कि पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को सबक सिखाना। इसके लिए गरीब बस्ती आजाद मोर्चा के बैनर तले जहां सात प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं, वहीं चार वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों को आजाद मोर्चा ने समर्थन दे दिया है। यहां तक की विधायक प्रवक्ता तक पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ पार्षद पद के लिए किस्मत अजमा रहे हैं। कुछ कार्यकर्ता तो ऐसे हैं, जो पार्टी प्रत्याशी के प्रचार से दूर रहकर परिचितों और समर्थकों के चुनाव मैनेजमेंट में जुट गए हैं।
निकाय चुनाव में कुछ बागी, असंतुष्टों को मनाने के साथ कांग्रेस से कुछ नेताओं को अपने पाले में खींचना भाजपा के लिए फायदेमंद तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतुष्टों के बगावत का झंडा बुलंद करने से पार्टी प्रत्याशी की मुसीबत कम होने के बजाय बढ़ गई हैं। विधायक राजकुमार ठुकराल के करीबी और उनके प्रवक्ता आशीष छाबड़ा वार्ड नंबर एक से निर्दलीय मैदान में ताल ठोक रहे हैं। विधायक के निगम प्रतिनिधि और पूर्व सभासद दिलीप अधिकारी ने नवगठित गरीब बस्ती आजाद मोर्चा के बैनर तले भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ सात प्रत्याशी उतारे हैं।
बगावती तेवर अपनाए नेताओं ने पार्टी का साथ भी नहीं छोड़ा
वहीं, चार वार्डों में बेहतर स्थिति वाले चार निर्दलीयों को समर्थन दिया है। इसी तरह वार्ड नंबर नौ से महिला मोर्चा की पदाधिकारी मलकीत कौर भी निर्दलीय मैदान में उतरी हैं। साथ ही वार्ड नौ से अनुसूचित मोर्चा के पदाधिकारी पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ पार्षद का चुनाव लड़ रहे हैं।
यही नहीं कुछ असंतुष्ट खुलेआम पार्टी से बगावत करने वालों के साथ नजर आ रहे हैं। इन लोगों ने मेयर प्रत्याशी के प्रचार से दूरी भी बना रखी है। छह वार्डों में प्रत्याशी नहीं होने से भाजपा पहले ही मैदान से बाहर हो चुकी है और अब कई वार्डों में पार्टी के बागियों से ही अधिकृत प्रत्याशियों को जूझना पड़ रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि बगावती तेवर अपनाए नेताओं ने पार्टी का साथ भी नहीं छोड़ा है।
टिकट नहीं मिलने से नाराज कुछ लोगों को मना लिया गया है। अन्य असंतुष्टों से लगातार बातचीत जारी है। पार्टी लाइन से बाहर जाकर काम करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों को चिह्नित भी किया जा रहा है। एक-दो दिन के भीतर प्रदेश नेतृत्व से अनुमति के बाद ऐसे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
- शिव अरोरा, जिलाध्यक्ष, भाजपा
गरीब बस्ती आजाद मोर्चा सात वार्डों में प्रत्याशी लड़ा रहा है और चार वार्डों में निर्दलियों को समर्थन दिया है। जिन लोगों ने वर्षों से पार्टी की सेवा की, उनका टिकट काटा गया। इन लोगों का सम्मान करते हुए मोर्चा से चुनाव लड़ाया गया है। मैंने भाजपा नहीं छोड़ी और न छोड़ूंगा। पार्टी के नुकसान की चिंता जिलाध्यक्ष को करनी चाहिए।
- दिलीप अधिकारी, संयोजक, गरीब बस्ती आजाद मोर्चा