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नीरा राडिया के इशारे पर फंसे बदरीनाथ के रावल

Fri, 07 Feb 2014 12:16 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 07 Feb 2014 12:16 PM IST
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niira radia creates problem for rawal

‘बदरीनाथ विश्व भर में आस्था का केंद्र है। यहां के रावल वी केशवन नंबूदरी पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद है। रावल निर्दोष हैं। यह सारा खेल नीरा राडिया के इशारे पर रचा गया है’।

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श्री बद्रीश पंडा पंचायत के सचिव बालक राम ध्यानी ने गुरुवार को राडिया और सहयोगियों पर यह आरोप जड़ा। अमर उजाला से बातचीत में ध्यानी ने बदरीनाथ में कारपोरेट के बढ़ते दखल पर निशाना साधा।
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कहा कि राडिया की निगाह बदरीधाम के समीप स्थित जमीनों पर है। उन्होंने आरोप लगाया कि वह रावल को दबाव में लेकर अपना दबदबा कायम करना चाहती थीं। ऐसा न हो पाने पर रावल को निशाने पर लिया गया।

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उन्होंने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के सीईओ पर भी निशाना साधा। कहा कि इस साजिश को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।

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सीईओ की तरफ से आचरण नियमावली तय किए जाने की कवायद पर उनका साफ कहना था कि यह सीईओ के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।

रावल का आचरण तय करेंगी पंचायतें

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बदरीनाथ मंदिर के रावल (मुख्य पुजारी) वी केशवन नंबूदरी के एक युवती से छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार होने के बाद अब इस प्रतिष्ठित पद के लिए आचरण नियमावली बनाने की कवायद शुरू हो गई है।

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नियमावली विभिन्न पंचायतों और धार्मिंक संगठनों से सुझाव के बाद तैयार की जाएगी।

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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के  मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बीडी सिंह के अनुसार इसके लिए श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत, माणा पंचायत, तीर्थ पुरोहित पंचायत, बद्रीश पंडा पंचायत समेत विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधियों से बात की जाएगी।

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जो भी निचोड़ निकलेगा, उसे नियमावली में शामिल किया जाएगा। इसके लिए पंचायतों, संगठनों के साथ बैठक आयोजित की जाएंगी। सम्मिलित बैठक बुलाए जाने के साथ ही अलग-अलग भी बात की जा सकती है।

बढ़ सकती है रिपोर्ट सौंपने की मियाद

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बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने इस मामले की जांच के लिए जो पांच सदस्यीय समिति बनाई है, अभी उसे 15 दिन में रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।

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लेकिन सीईओ की मानें तो यह मियाद बढ़ सकती है। उनकी मानें तो मामले में न्यायिक दखल होने के चलते ऐसा होना लगभग तय है।

जांच समिति में हैं यह पांच सदस्य
- चंद्र किशोर मैठाणी (मंदिर समिति के सदस्य)
- शिशुपाल सिंह (मंदिर समिति के विधि अधिकारी)

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- अनिल शर्मा (केदारनाथ मंदिर के अधिशासी अधिकारी)
- भुवन उनियाल (बदरीनाथ के धर्माधिकारी)
- राजेंद्र नैथानी (वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी)

बदरीकाश्रम छोड़ने का मुद्दा भी गरमाया

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रावल के शीतकाल में बदरीकाश्रम क्षेत्र छोड़ने का मामला अब बहस का मुद्दा बन गया है। रावल बदरी-केदार मंदिर समिति के वेतनभोगी कर्मचारी हैं।

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मंदिर समिति द्वारा शीतकाल में इनकी उपस्थिति कहां दर्शायी जाती है, इसका कोई जवाब समिति के पास भी नहीं है। विदित हो कि प्राचीन काल में बदरीनाथ के रावल छह माह बदरीनाथ में मानवों के प्रतिनिधि के रूप में बदरीविशाल की पूजा-अर्चना करते थे और शीतकाल में छह माह तक जोशीमठ में निवास कर अनुष्ठान में लीन रहते थे।

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लेकिन सत्तर के दशक में समिति द्वारा उनकी मांग पर उन्हें घर (केरल) जाने की अनुमति प्रदान कर दी गई जो आज भी निरंतर चल रही है।

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अब सवाल उठना लाजमी है कि बिना उपस्थिति के समिति रावल को शीतकाल में छह माह तक वेतन किस आधार पर देती है। जबकि मंदिर समिति के अन्य वेतन भोगी कर्मचारी बदरीनाथ के शीतकालीन कार्यालय जोशीमठ में अपनी सेवाएं देते हैं।

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मंदिर समिति यह मानकर रावल को शीतकाल में देशाटन की इजाजत देती है कि वे सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए जाते हैं। लेकिन रावल के हाल के प्रकरण से व्यवस्था में फेरबदल करने की जरूरत है। इस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
- बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी, बदरी-केदार मंदिर समिति

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