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Dehradun News: अतिक्रमण नहीं तोड़ने पर एनजीटी ने जताई नाराजगी
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-एनजीटी ने पूछा क्यों नहीं तोड़े 2016 से पहले के आवास-नगर निगम ने दिया अध्यादेश का हवाला
रिस्पना किनारे हुए अतिक्रमण को लेकर एनजीटी में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कम संख्या में अतिक्रमण हटाने की वजह पूछी। इसके साथ ही इसे एनवायरमेंट एक्ट का उल्लंघन भी बताया। एनजीटी ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी नियत की है।
रिस्पना किनारे बसी मलिन बस्तियों को लेकर निरंजन बागची बनाम उत्तराखंड सरकार का एक मामला राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में चल रहा है। सोमवार को इसकी सुनवाई हुई तो सचिव सिंचाई विभाग आर राजेश कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल और नगर आयुक्त गौरव कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में जुड़े।
एनजीटी ने रिस्पना किनारे अवैध रूप से बसी मलिन बस्तियों के अतिक्रमण पर कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी। नगर निगम ने बताया कि 2016 के बाद बने 69 आवासों पर अतिक्रमण हटाने के दौरान कार्रवाई हुई। एनजीटी ने कहा, 2016 से पहले के अतिक्रमण को क्यों नहीं हटाया गया। तब नगर निगम ने मलिन बस्तियों को सुरक्षा देने वाले अध्यादेश का हवाला दिया। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और एनवायरमेंट एक्ट का हवाला भी दिया। एनजीटी ने नाराजगी जाहिर करते हुए फरवरी की तारीख लगाई है।
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फ्लड प्लेन जोन की तैयारी करके गए थे अधिकारी, एनजीटी ने अतिक्रमण पर की सुनवाई
दरअसल, इस प्रकरण में फ्लड प्लेन जोन निर्धारित करने का आदेश भी किया गया है। जो लगभग तैयार हो चुका है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों सहित अन्य अधिकारी फ्लड प्लेन जोन निर्धारित करने और उससे संबंधित तैयारियों को लेकर एनजीटी में पहुंचे थे। बताया जाता है कि फ्लड प्लेन जोन को लेकर ज्यादा बात नहीं हुई एनजीटी का सारा ध्यान रिस्पना किनारे अतिक्रमण पर रहा।
रिस्पना किनारे हुए अतिक्रमण को लेकर एनजीटी में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कम संख्या में अतिक्रमण हटाने की वजह पूछी। इसके साथ ही इसे एनवायरमेंट एक्ट का उल्लंघन भी बताया। एनजीटी ने इस प्रकरण की अगली सुनवाई के लिए 13 फरवरी नियत की है।
रिस्पना किनारे बसी मलिन बस्तियों को लेकर निरंजन बागची बनाम उत्तराखंड सरकार का एक मामला राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण में चल रहा है। सोमवार को इसकी सुनवाई हुई तो सचिव सिंचाई विभाग आर राजेश कुमार, जिलाधिकारी देहरादून सविन बंसल और नगर आयुक्त गौरव कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सुनवाई में जुड़े।
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एनजीटी ने रिस्पना किनारे अवैध रूप से बसी मलिन बस्तियों के अतिक्रमण पर कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी। नगर निगम ने बताया कि 2016 के बाद बने 69 आवासों पर अतिक्रमण हटाने के दौरान कार्रवाई हुई। एनजीटी ने कहा, 2016 से पहले के अतिक्रमण को क्यों नहीं हटाया गया। तब नगर निगम ने मलिन बस्तियों को सुरक्षा देने वाले अध्यादेश का हवाला दिया। जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की और एनवायरमेंट एक्ट का हवाला भी दिया। एनजीटी ने नाराजगी जाहिर करते हुए फरवरी की तारीख लगाई है।
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फ्लड प्लेन जोन की तैयारी करके गए थे अधिकारी, एनजीटी ने अतिक्रमण पर की सुनवाई
दरअसल, इस प्रकरण में फ्लड प्लेन जोन निर्धारित करने का आदेश भी किया गया है। जो लगभग तैयार हो चुका है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों सहित अन्य अधिकारी फ्लड प्लेन जोन निर्धारित करने और उससे संबंधित तैयारियों को लेकर एनजीटी में पहुंचे थे। बताया जाता है कि फ्लड प्लेन जोन को लेकर ज्यादा बात नहीं हुई एनजीटी का सारा ध्यान रिस्पना किनारे अतिक्रमण पर रहा।