गंगा सफाई पर उत्तराखंड की सुस्ती से बिफरी एनजीटी
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उत्तराखंड सरकार अभी तक भागीरथी नदी के पर्यावरण संवेदी क्षेत्र से संबंधित जोनल मास्टर प्लान नहीं तैयार कर सकी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इसके लिए सरकार को जमकर फटकार लगाई है। एनजीटी ने अपने निर्देश में कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार के संबंधित एडीशनल चीफ सेक्रेट्री और पर्यावरण मंत्रालय के संबंधित अधिकारी से जवाब-तलब किया है।
ग्रीन बेंच ने अधिकारियों से पूछा है कि वे बताएं कि अब तक पूर्व में दिए गए आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया। मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने लीगल एड कमेटी, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान बेंच ने इसी मामले में 5 अगस्त 2015 को दिए निर्देश का हवाला देते हुए कहा कि हम यह समझ पाने में असफल हैं कि मॉनिटरिंग कमेटी ने मास्टर जोनल प्लान को प्रारूप देने के लिए बीते महीनों में क्यों नहीं बैठकें कीं और प्रयास किए। यह पूरी तरह से ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन है। कमेट इको सेंसेटिव जोन को लेकर संवेदनशील नहीं है।
2012 से नहीं तैयार हो सका जोनल मास्टर प्लान
इससे पहले ग्रीन बेंच ने कहा कि 18 दिसंबर, 2012 को पर्यावरण मंत्रालय ने भागीरथी नदी के पर्यावरण संवेदी क्षेत्र को लेकर अधिसचना जारी की थी। इसके साथ ही राज्य सरकार से जोनल मास्टर प्लान तैयार करने और अनुमति लेने के लिए भी कहा गया था। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं हो सका है। ग्रीन बेंच ने कहा कि 5 अगस्त, 2015 से यह मामला हमारे पास लंबित है। कई आदेशों के बावजूद अभी तक राज्य सरकार की ओर से प्लान पेश नहीं किया गया।
सिर्फ तारीखें मांगते रहे वकील
ग्रीन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से संबंधित मामले पर पेश वकील समय-समय पर सिर्फ तारीखें मांगते रहे। जबकि ट्रिब्युनल के जरिए 3 सितंबर 2015 को दिए गए विस्तृत आदेश में कहा गया था कि इस मामले पर अब और तारीख नहीं दी जाएगी साथ ही अब इसका निपटारा किया जाएगा। हालांकि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजतक इस मामले पर कुछ भी ठोस नहीं किया जा सका है। वहीं राज्य सरकार की ओर से मौजूद वकील ने कहा कि वह स्पष्ट निर्देश लेकर इस मामले पर अपना पक्ष रखेंगे।
दो वर्षों से मामला लंबित
मालूम हो कि नदी के पर्यावरण संवेदी क्षेत्र में चल रहे प्रोजेक्ट और काम के लिए एनजीटी ने राज्य सरकार से जोनल मास्टर प्लान पेश करने को कहा था। बीते दो वर्षों से यह मामला ट्रिब्युनल में लंबित है। हालांकि ग्रीन बेंच ने राज्य सरकार के लचर रवैये पर अपनी नाराजगी जाहिर कर अधिकारियों को तलब किया है।