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नवजात को अस्पताल में बेड नहीं मिला, 12 घंटे में ही थम गई उसकी सांसें
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Sun, 03 Sep 2017 09:45 AM IST
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मासूम ने जन्म के 12 घंटे बाद ही दम तोड़ दिया
- फोटो : Baby Physio London
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हल्द्वानी के बदहाल सुशीला तिवारी अस्पताल की बेहाल व्यवस्था एक बार फिर सामने आई। इस बार डॉक्टरों लापरवाही के चलते एक मासूम ने जन्म के 12 घंटे बाद ही दम तोड़ दिया।
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पिथौरागढ़ की प्रसूता को नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में बेड नहीं मिल पाया। घर वाले डॉक्टरों की गुहार लगाते रहे, मगर उन्होंने बेड खाली न होने की बात कहकर प्राइवेट अस्पताल में ले जाने की सलाह दे डाली।
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यहां गरीबी आड़े आ गई। हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि बच्ची को एनआईसीयू में रखा गया था। उसके परिजन खुद प्राइवेट अस्पताल ले गए और बाद में एसटीएच लाए।
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बेड खाली न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया
डॉक्टरों ने उसे बच्ची को निजी अस्पताल में ले जाने को कहा
पिथौरागढ़ बाजार निवासी महेश पांडे की पत्नी रेनू पांडे (33) को प्रसव पीड़ा होने पर 31 अगस्त की रात को सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया था। रेनू को स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में भर्ती किया गया।
देर रात लगभग दो बजे रेनू ने ऑपरेशन से बच्ची को जन्म दिया। महेश के अनुसार जन्म के समय बच्ची की हालत कुछ खराब थी। उसे नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में बेड की जरूरत थी। ऐसा उसे डॉक्टरों ने ही बताया था मगर उन्होंने बेड खाली न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
महेश के अनुसार डॉक्टरों ने उसे बच्ची को निजी अस्पताल में ले जाने को कहा। महेश ने कहा कि यदि पैसे होते तो वह पहले ही निजी अस्पताल में ले जाता। वह बहुत दूर से आया है उसकी गरीबी का ख्याल रखा जाए। एक सितंबर को बच्ची ने दोपहर लगभग 12 बजे दम तोड़ दिया।
एनआईसीयू में बेड की समस्या रहती है। शनिवार भी पांचों बेड फुल हैं। बच्ची का वजन बहुत कम था। वह डेढ़ किलो की थी और उसके सांस की समस्या थी। बच्ची को एनआईसीयू में रखा गया था। बच्ची को उसके परिजन खुद निजी अस्पताल ले गए थे और दोबारा फिर एसटीएच लेकर आए थे।
- डॉ. एके पांडे, एमएस एसटीएच
देर रात लगभग दो बजे रेनू ने ऑपरेशन से बच्ची को जन्म दिया। महेश के अनुसार जन्म के समय बच्ची की हालत कुछ खराब थी। उसे नियो नेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में बेड की जरूरत थी। ऐसा उसे डॉक्टरों ने ही बताया था मगर उन्होंने बेड खाली न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
महेश के अनुसार डॉक्टरों ने उसे बच्ची को निजी अस्पताल में ले जाने को कहा। महेश ने कहा कि यदि पैसे होते तो वह पहले ही निजी अस्पताल में ले जाता। वह बहुत दूर से आया है उसकी गरीबी का ख्याल रखा जाए। एक सितंबर को बच्ची ने दोपहर लगभग 12 बजे दम तोड़ दिया।
एनआईसीयू में बेड की समस्या रहती है। शनिवार भी पांचों बेड फुल हैं। बच्ची का वजन बहुत कम था। वह डेढ़ किलो की थी और उसके सांस की समस्या थी। बच्ची को एनआईसीयू में रखा गया था। बच्ची को उसके परिजन खुद निजी अस्पताल ले गए थे और दोबारा फिर एसटीएच लेकर आए थे।
- डॉ. एके पांडे, एमएस एसटीएच