उत्तराखंड में टैक्स वसूली के बने नए रिकॉर्ड, बढ़े एक लाख नए करदाता
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्य आयकर आयुुक्त रजनी कांत गुप्ता ने बताया कि गत वर्ष प्रदेश मेें 10,840 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली हुई थी। इस साल टारगेट 12,179 करोड़ रुपये का रखा गया है। इस वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अभी तक टैक्स वसूली में 44.46 प्रतिशत की ग्रोथ दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि ओएनजीसी से इस साल अभी तक दो तिमाही में 4,900 करोड़ रुपये टैक्स वसूल किया जा चुका है।
गत वर्ष दो तिमाही में ओएनजीसी ने 2050 करोड़ रुपये एडवांस टैक्स जमा कराया था। गत वर्ष ओएनजीसी से 9,739 करोड़ रुपये का टैक्स मिला था। प्रदेश में नए करदाताओं की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस साल 1,37,470 नए करदाता का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें से अभी तक 1,08,089 नए करदाता सामने आ चुके हैं। वित्तीय वर्ष खत्म होने तक इनकी संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है। 31 मार्च 2018 तक प्रदेश में 7,68,213 करदाता थे, जिनकी संख्या बढ़कर अब 8,76,302 हो गई है।
सर्वेक्षण से पकड़ा 30 करोड़ का काला धन
आयकर विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में अभी तक प्रदेश में 16 सर्वेक्षण किए हैं। इनसे अभी तक विभाग ने 30 करोड़ रुपये का काला धन पकड़ा है। मुख्य आयकर आयुुक्त ने बताया आयकर विभाग की ओर से सर्वेक्षण की कार्रवाई जारी है। इसमें राशि बढ़ सकती है।
20 लाख से कम दावेदारी वाले वादों में पैरवी नहीं करेगा आयकर विभाग
20 लाख से कम टैक्स दावेदारी वाले मामलों में अब आयकर विभाग उलट फैसला आने के बाद आगे की लड़ाई नहीं लड़ेगा। केंद्र सरकार ने लगातार बढ़ रहे वादों के चलते यह बदलाव किया है। इसके तहत हाईकोर्ट में 50 लाख रुपये से कम और सुप्रीम कोर्ट में एक करोड़ रुपये से कम दावेदारी वाले मामलों में अब आयकर विभाग कानूनी लड़ाई नहीं लड़ेगा।
बृहस्पतिवार को आयकर भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्य आयकर आयुक्त रजनी कांत गुप्ता ने बताया कि सरकार के फैसले के बाद उत्तराखंड में ऐसे 77 मामलों से आयकर विभाग ने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इनमें ट्रिब्यूनल के 64 और हाईकोर्ट के 13 मामले शामिल हैं। यह वाद कुल करीब 250 करोड़ रुपये की टैक्स दावेदारी के थे।
उन्होंने बताया कि अब ट्रिब्यूनल से यदि किसी 20 लाख रुपये से कम, हाईकोर्ट से 50 लाख रुपये से कम और सुप्रीम कोर्ट से एक करोड़ रुपये से कम टैक्स दावेदारी के मामले में आयकर विभाग हार जाता है तो उसकी आगे पैरवी नहीं की जाएगी। संबंधित न्यायालय के आदेश को ही पूर्ण रूप से लागू कर दिया जाएगा। यह नियम न केवल भविष्य के वादों में लागू होगा बल्कि इसी नियम के तहत पुराने वादों को भी वापस लिया गया है।