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ईश्वरन नंबूदरी बने बदरीधाम के नए रावल
अमर उजाला, जोशीमठ (चमोली)
Updated Sat, 03 May 2014 05:07 PM IST
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अक्षय तृतीया और रोहिणी नक्षत्र के संयोग काल में शुक्रवार को वेदपाठियों के वेद मंत्रोच्चारण के साथ बदरीनाथ धाम के 19वें रावल (मुख्य पुजारी) का तिलपात्र (पूजा कार्यक्रम) हुआ। इसके बाद ईश्वरन नंबूदरी को रावल (कार्यवाहक) का दायित्व सौंपा गया।
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जोशीमठ नृसिंह मंदिर परिसर में बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल, रावल के कुल पुरोहित गिरीश चंद्र सती और संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ और मंडल के छात्रों, बीकेटीसी के वेदपाठियों ने धार्मिक विधि-विधान के साथ रावल का तिलपात्र किया।
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कार्यवाहक रावल होंगे
तड़के पांच बजे सबसे पहले मंगलाचरण और गणेश पूजा हुई। इसके बाद रावल का मुंडन संस्कार किया गया। हल्दी, घी, दही, शहद से रावल को मंगल स्नान कराया गया। एक घंटे तक चले इस कार्यक्रम के बाद हवन यज्ञ हुआ।
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अपराह्न तीन बजे रावल ईश्वरन नंबूदरी ने नृसिंह मंदिर में भगवान बदरीनाथ के दर्शन कर छह माह तक बदरीनाथ धाम में पूजा-अर्चना की आज्ञा मांगी। हालांकि वे कार्यवाहक रावल होंगे।
केशवन नंबूदरी को रावल पद से निलंबन के चलते यह व्यवस्था की गई है।
नई आचरण नियमावली सुनाई
तिलपात्र के बाद सार्वजनिक रूप से बदरीनाथ के धर्माधिकारी ने रावल के लिए बनाई गई नई आचरण नियमावली पढ़कर सुनाई।
नियमावली में रावल को धाम की पवित्रता बनाए रखने और छह माह तक धाम में ही रहने को कहा गया। रावल बदरीनाथ में शाम को लगने वाले बालभोग के बाद ही अन्न ग्रहण करेंगे।
रिश्तेदारों से मिलने पर रोक
रावल के कमरे में कोई भी तीर्थयात्री प्रवेश नहीं करेगा। यात्राकाल में मां और बहन के साथ ही किसी भी रिश्तेदार से रावल मुलाकात नहीं करेंगे।
सितंबर माह में माणा गांव में स्थित माता मूर्ति मंदिर में पूजा-अर्चना के दौरान ही रावल नारायण पर्वत से नर पर्वत तक आ सकेंगे, लेकिन इस दौरान वह कंचन गंगा से नीचे नहीं आ सकते हैं। इस नियमावली पर रावल ने अपनी सहमति जताई।