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उत्तराखंड में बढ़ गया कुंभ क्षेत्र का दायरा, अब यहां तक होगा क्षेत्र
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 04 Oct 2015 01:22 PM IST
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उत्तराखंड सरकार ने अर्द्ध कुंभ 2016 के मेला क्षेत्र में नगर पंचायत देवप्रयाग को भी शामिल कर लिया है। मेला क्षेत्र को अधिसूचित किए जाने की यह व्यवस्था 1938 के संयुक्त प्रांत अधिनियम के तहत की गई।
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शनिवार को शहरी विकास विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए। उधर, हरिद्वार में सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है। वहां के लोग इसे केवल बजट खपाने का खेल बता रहे हैं। शहरी विकास विभाग के आदेश के मुताबिक एक जनवरी 2016 से 30 अप्रैल 2016 तक के लिए देवप्रयाग को मेला क्षेत्र घोषित किया गया है।
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अभी तक मेला क्षेत्र ऋषिकेश में मुनिकिरेती तक ही घोषित था। हालांकि अर्द्धकुंभ या कुंभ के दौरान श्रद्धालु ऋषिकेश से आगे भी जाते रहे हैं। लेकिन मेला प्रशासन ऋषिकेश तक ही मेला क्षेत्र मानते हुए निर्माण और अन्य कार्य करवाता आया है। मेला क्षेत्र का यह विस्तार संयुक्त प्रांत अधिनियम के दायरे में किया गया है। इसमें राज्य सरकार को मेला क्षेत्र घोषित करने और मेला अधिकारी नियुक्त करने का अधिकार है।
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1938 में पहली बार इस अधिनियम के तहत कुंभ मेला क्षेत्र अधिसूचित किया गया था। तब यह अधिनियम पूरे उत्तर प्रदेश में प्रभावी था। अलग राज्य बनने के बाद उत्तराखंड ने भी इस अधिनियम को स्वीकार करते हुए लागू कर दिया। तब से यह अधिनियम बिना किसी खास संशोधन के चला आ रहा है। इस लिहाज से देखा जाए तो सरकार ने 1938 के अधिनियम में पहली बार खास संशोधन किया है।
आपको बता दें कि देवप्रयाग में ही बदरीनाथ से आने वाली अलकनंदा और गोमुख से निकलने वाली भागीरथी नदी का संगम होता है। लिहाजा देवप्रयाग को मेला क्षेत्र में शामिल किए जाने की मांग बहुत पहले से होती रही है। देवप्रयाग के विधायक और शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने राज्य सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है तो शहरी विकास मंत्री प्रीतम पंवार भी मान रहे हैं कि इससे समूचे क्षेत्र का विकास हो सकेगा।
देवप्रयाग नगर पंचायत की जनसंख्या करीब 2800 है। इसके तीन वार्ड टिहरी तो एक वार्ड पौड़ी जिले में शामिल है। जबकि हरिद्वार में स्थानीय संगठनों का कहना है कि कुंभ मेला क्षेत्र का बजट देवप्रयाग में खपाने के लिए ही मेला क्षेत्र का विस्तार किया गया है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
राज्य सरकार का यह कदम ऐतिहासिक है। चूंकि देवप्रयाग से ही गंगा का असली स्वरूप बनता है। इस लिहाज से भी कुंभ क्षेत्र के दायरे में बढ़ोतरी स्वागत योग्य है। इससे क्षेत्र का समुचित विकास हो सकेगा।
- मंत्री प्रसाद नैथानी, शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड