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पुरानों का हाल है बेहाल, फिर क्यों खुल रहे नए निकाय?

Thu, 29 Dec 2016 11:56 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 29 Dec 2016 11:56 PM IST
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new bodies establishment by uttarakhand government.
सीएम हरीश रावत - फोटो : file photo

पिछले दो साल के दौरान एक दर्जन से ज्यादा नए निकायों के गठन पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव से पहले सरकार चार और निकायों को नगर निगम का दर्जा देने की तैयारी में है। मगर निकायों का असल सच यह है कि इनमें से ज्यादातर निकाय गंभीर वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।

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तकरीबन सभी निकायों में स्वीकृत ढांचे के सापेक्ष स्टॉफ  नहीं हैं। जिन निकायों में जो कर्मचारी हैं, वे महीनों से पगार का इंतजार कर रहे हैं। केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा पर जो राशि निकायों को मिलती है, वो विकास कार्यों के बजाय कर्मचारियों के वेतन में खप जाती है।
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पिछले दो वर्ष में सरकार एक दर्जन से अधिक शहरी निकायों का गठन कर चुकी है। आधा दर्जन निकाय उच्चीकृत हुईं। चुनावी साल में सरकार ने चार नगर पालिकाओं क्रमश: मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और श्रीनगर को नगर निगम का दर्जा देने की तैयारी कर ली।
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वर्तमान में छह नगर निगम, 38 नगर पालिकाएं और 45 नगर पंचायतें अस्तित्व में आ चुकी हैं। मजेदार बात यह है कि इनमें ज्यादातर निकायों की हालत बेहद खस्ता है। मसूरी, नैनीताल नगर पालिका और देहरादून, हरिद्वार, रुद्रपुर और काशीपुर नगर निगमों को अपवाद स्वरूप छोड़ दें तो ज्यादातर निकायों की माली हालत बेहद खराब है।

कई निकायों में कर्मचारियों को महीनों से पगार नहीं मिली है। कई निकायों में दक्ष स्टॉफ का अभाव है। वे केंद्रीय वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों पर मिलने वाली राशि पर निर्भर है।

निकाय भी जिम्मेदार

new bodies establishment by uttarakhand government.
हरीश रावत - फोटो : file photo

खराब माली हालत के लिए निकाय भी बराबर के जिम्मेदार है। शासन स्तर पर उनके लिए मानक बनाए गए हैं। देहरादून, मसूरी, नैनीताल, हरिद्वार, काशीपुर और रुद्रपुर निकायों को छोड़कर बाकी निकायों में कर वसूली की कार्यवाही बेहद ढीली है। इस वजह से वे राज्य वित्त आयोग के तहत मिलने वाली बढ़ी हुई राशि से भी महरूम है।

आयोग ने आय बढ़ाने वाले निकायों को प्रोत्साहन के स्वरूप बढ़ी हुई राशि का प्रावधान कर रखा है। कायदे से आयोग की राशि विकास कार्यों पर भी खर्च होनी चाहिए। लेकिन घाटे में होने की वजह से निकाय इस राशि का इस्तेमाल कर्मचारियों के वेतन पर करते हैं। 

‘शासन स्तर पर निकायों को आय बढ़ाने को लेकर समय-समय पर दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं। कुछ निकायों ने अच्छा किया भी है। लेकिन अधिकांश निकायों की स्थिति खराब है। उन्हें कर वसूली की कार्यवाही को प्रभावी बनाना होगा।’
-डीएस गर्ब्याल, सचिव शहरी विकास।

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