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...तो अब मुश्किल होगा बैंक में नौकरी मिलना
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 25 Dec 2013 09:42 AM IST
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देहरादून जिले में सहकारिता में नई नियुक्तियों की राह खुलने से पहले ही बंद होने की कगार पर है। वर्ग चार की करीब 250 नई नियुक्तियों के लिए शासनादेश जारी हो चुका है।
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जिलाध्यक्ष इस बात से भी नाखुश
लेकिन अब जिला सहकारी बैंक इसके लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं। अधिकतर बैंक इस काम को पचड़े का मान रहे हैं। सहकारी बैंकों के जिलाध्यक्ष अंदरखाने इस बात से भी नाखुश हैं कि बैंकों में नियुक्तियों के लिए गठित कमेटियों में राज्य सहकारी बैंक को भी शामिल किया गया है।
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सहकारिता में 2003 में नियुक्तियों को लेकर खासा विवाद हुआ था। इसके बाद से ही सहकारिता में नई नियुक्तियों पर अघोषित प्रतिबंध लग गया था। इस बार प्रदेश सरकार ने हिम्मत करके वर्ग चार की नियुक्तियों के दरवाजे भी खोले।
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हाल ही में जारी शासनादेश में जिला सहकारी बैंकों और शीर्ष सहकारी संस्थाओं में गार्ड सहित वर्ग चार की नई भर्तियों के लिए कमेटियों का गठन कर दिया गया।
भर्ती के लिए बैंक तैयार नहीं
मुसीबत यह है कि वर्ग चार की भर्ती के लिए बैंक तैयार नहीं हो रहे हैं। एक बैंक अध्यक्ष के मुताबिक बैंकों में पहले से ही उपनल के जरिए संविदा पर नियुक्तियां हैं। ऐसे में नियमित नियुक्तियों को बैंक खर्च बढ़ाने वाला मान रहे हैं।
कुछ बैंक अध्यक्षों की नाराजगी नियुक्ति कमेटी में राज्य सहकारी बैंक का प्रतिनिधि नामित करने को लेकर है। दरअसल जारी शासनादेश में जिला सहकारी बैंकों में नियुक्तियों के लिए गठित कमेटी में बैंक अध्यक्ष के अलावा शीर्ष सहकारी बैंकों के दो प्रतिनिधियों को भी शामिल करने का निर्देश दिया गया है।
ऐसे में नियुक्तियों पर अपरोक्ष रुप से शीर्ष संस्थाओं का नियंत्रण रहने की बात भी हो रही है। बैंक अध्यक्षों के मुताबिक करीब 250 नियुक्तियों की जरूरत बैंकों को है पर नियमित नियुक्ति की जगह इन्हें उपनल के जरिए संविदा पर नियुक्तियां ज्यादा रास आ रही हैं।