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Dehradun News: आरोपी की नहीं कराई पहचान, संदेह का लाभ पाकर हुआ बरी
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Iनवंबर 2021 में छह साल की बच्ची से छेड़खानी के आरोप में हुआ था मुकदमाI
असल आरोपी कौन है इस बात को न तो पीड़िता और न ही उसकी मां पहचान पाई। पुलिस ने कभी आरोपी की पहचान ही नहीं कराई। ऐसे में छह साल की बच्ची से छेड़खानी के मुकदमे में कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
मुकदमा नेहरू कॉलोनी थाने में 15 नवंबर 2021 को दर्ज किया गया था। छह साल की बच्ची की मां ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी घर के बाहर खेल रही थी। इस दौरान एक व्यक्ति आया और उसे दस रुपये का नोट देकर जंगल की ओर ले गया। आरोपी का नाम महिला ने ताजिम निवासी गोपालपुर, मंडावर बिजनौर बताया था। आरोप था कि जब बच्ची चिल्लाई तो महिला ने भागकर अपनी बेटी को उसके चंगुल से मुक्त कराया। शाम के वक्त भी ताजिम आया और बच्ची से छेड़खानी की, जिसे पड़ोसियों ने देखा और उसे वहां से भगाया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता आशुतोष गुलाटी ने बताया कि स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में ट्रायल के दौरान महिला ने कहा कि वह ताजिम को नहीं जानती है। उसने घटना के वक्त उसका चेहरा नहीं देखा था। इसके बाद पीड़िता को कोर्ट ने अहम गवाह माना और उसके बयानों को आधार बनाया। पीड़िता ने कहा कि वह अंकल को नहीं जानती। उसने 10 रुपये तो दिए थे, लेकिन उसका हाथ नहीं पकड़ा था। न ही उसने किसी अंग को छुआ। गुलाटी ने कहा कि पुलिस ने न तो जेल में और न ही कोर्ट में आरोपी की पहचान कराई। ऐसे में कोर्ट ने ताजिम को संदेह का लाभ पाने का हकदार मानते हुए बरी कर दिया।
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असल आरोपी कौन है इस बात को न तो पीड़िता और न ही उसकी मां पहचान पाई। पुलिस ने कभी आरोपी की पहचान ही नहीं कराई। ऐसे में छह साल की बच्ची से छेड़खानी के मुकदमे में कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
मुकदमा नेहरू कॉलोनी थाने में 15 नवंबर 2021 को दर्ज किया गया था। छह साल की बच्ची की मां ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी घर के बाहर खेल रही थी। इस दौरान एक व्यक्ति आया और उसे दस रुपये का नोट देकर जंगल की ओर ले गया। आरोपी का नाम महिला ने ताजिम निवासी गोपालपुर, मंडावर बिजनौर बताया था। आरोप था कि जब बच्ची चिल्लाई तो महिला ने भागकर अपनी बेटी को उसके चंगुल से मुक्त कराया। शाम के वक्त भी ताजिम आया और बच्ची से छेड़खानी की, जिसे पड़ोसियों ने देखा और उसे वहां से भगाया।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता आशुतोष गुलाटी ने बताया कि स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में ट्रायल के दौरान महिला ने कहा कि वह ताजिम को नहीं जानती है। उसने घटना के वक्त उसका चेहरा नहीं देखा था। इसके बाद पीड़िता को कोर्ट ने अहम गवाह माना और उसके बयानों को आधार बनाया। पीड़िता ने कहा कि वह अंकल को नहीं जानती। उसने 10 रुपये तो दिए थे, लेकिन उसका हाथ नहीं पकड़ा था। न ही उसने किसी अंग को छुआ। गुलाटी ने कहा कि पुलिस ने न तो जेल में और न ही कोर्ट में आरोपी की पहचान कराई। ऐसे में कोर्ट ने ताजिम को संदेह का लाभ पाने का हकदार मानते हुए बरी कर दिया।
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