नीट रिजल्ट 2021: बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए किसान पिता ने छोड़ा गांव, हासिल किए 619 अंक
विपुल ने बताया कि कोचिंग के अलावा नियमित तौर पर घर पर छह घंटे पढ़ाई की। हफ्ते के सातों दिन कोचिंग और घर पर सेल्फ स्टडी काम आई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मूल रूप से देवबंद निवासी किसान ब्रह्म सिंह ने बेटे विपुल को डॉक्टर बनाने का सपना देखा था। जो देवबंद में रहकर पूरा कर पाना खासा मुश्किल था। वहां बेहतर कोचिंग और अन्य सुविधाएं नहीं थीं। इसलिए वर्ष 2013 में अपना गांव छोड़ दिया और दून आकर बस गए। आज बेटे विपुल ने 619 अंकों के साथ नीट क्वालिफाई कर पिता के त्याग को सार्थक कर दिया है।
नीट रिजल्ट 2021: उत्तराखंड में हल्द्वानी के क्षितिज ने किया टॉप, जुनून काम आया और मिल गई मनपसंद रैंक
ब्रह्म सिंह गांव में खेती-किसानी किया करते थे। उन्होंने अपने खेत बंटाई पर दे दिए और बेटे की बेहतर तैयारियों के लिए वो दून आ गए। बलूनी क्लासेस के प्रबंध निदेशक विपिन बलूनी के मार्गदर्शन में विपुल ने कोचिंग की। विपुल को शहरी माहौल में एडजस्ट करने में कुछ दिक्कत हुई, लेकिन जब लय पकड़ी तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। हर यूनिट टेस्ट के साथ उसके अंक बढ़ते चले गए।
विपुल ने बताया कि कोचिंग के अलावा नियमित तौर पर घर पर छह घंटे पढ़ाई की। हफ्ते के सातों दिन कोचिंग और घर पर सेल्फ स्टडी काम आई। इसके अलावा डाउट क्लियर करने के लिए शिक्षकों के साथ अलग बैठकर डिस्कस किया। कोरोना लॉक डाउन के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई की और तैयारियों पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ने दिया। इस दौरान कोई ब्रेक भी नहीं लिया। खेलकूद, सोशल मीडिया, टीवी सबसे दूरी बनाकर रखी।
शर्मा परिवार में जुड़वां खुशी, नीट में चमके कार्तिकेय
नीट के परिणाम दून के शर्मा परिवार के लिए दोहरी खुशी लेकर आए। उनके बेटे कार्तिकेय ने 680 अंक हासिल कर देशभर में 973वां स्थान हासिल किया। कुछ दिन पूर्व उनके जुड़वा भाई विनायक ने जेईई एडवांस में करीब 11 हजार रैंक हासिल की थी।
कार्तिकेय ने इसी साल दून इंटरनेशनल स्कूल से 92.2 फीसदी अंकों के साथ 12वीं उत्तीर्ण की थी। कार्तिकेय के पिता डॉ. पंकज शर्मा स्वास्थ्य महानिदेशालय में तैनात हैं। मां मधु शर्मा गृहिणी हैं। कार्तिकेय ने बताया कि बचपन में अपने पिता को देखकर उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना देखा। अविरल क्लासेस के निदेशक डीके मिश्रा ने नौवीं कक्षा से उन्हें तैयारी करने की सलाह दी। चार साल की कड़ी मेहनत के बाद कार्तिकेय ने पहले ही प्रयास में रिकॉर्ड अंक हासिल किए।
कार्तिकेय पढ़ाई के अलावा गीत-संगीत, वाद-विवाद में भी पूरी दिलचस्पी लेते हैं। सोशल मीडिया से उन्होंने दूरी बनाकर रखी है। कार्तिकेय का कहना है कि सोशल मीडिया कुछ देर के लिए खुशी देता है, लेकिन तैयारी करने वालों को इस पर अपना समय बर्बाद करने से बचना चाहिए। हर विषय पर फोकस कर पढ़ना, एनसीईआरटी से तैयारी, टापिक वाइज पढ़ाई और नियमित अभ्यास फायदेमंद होता है।
डॉक्टर बनकर वाहन चालक पिता का सपना पूरा करेगी बिटिया
प्रोटेस्ट कैंसर पीड़ित वाहन चालक पिता की बिटिया मीनाक्षी ने नीट में 555 अंक हासिल कर परिवार का सिर गर्व से ऊंचा किया है। बेहद अभावों में पली मीनाक्षी ने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। पिछले वर्ष मीनाक्षी ने 529 अंक हासिल किए थे। इसके बाद उसने पूरे साल मेहनत के साथ पढ़ाई की और करीब 26 अंकों की बढ़ोत्तरी के साथ नीट क्वालिफाई कर लिया।
मूलत: पौड़ी गढ़वाल के गैंडखाल निवासी मीनाक्षी का परिवार हरिद्वार में रहता है। अभावों के कारण मीनाक्षी के लिए कोचिंग कर पाना आसान नहीं था। उसने मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए तैयारी की और सफलता हासिल कर ली।
पहले साल 529 अंक हासिल करने के बाद मीनाक्षी ने दोगुनी मेहनत की। मीनाक्षी ने नियमित तौर पर पांच से छह घंटे की पढ़ाई की। इसमें उन्होंने किसी तरह का समझौता नहीं किया।