दिल से मांगी हर मुराद पूरी करते हैं ये महाराज
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उत्तराखंड में भवाली-अल्मोड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे स्थित कैंची धाम स्थापना के बाद से जनमानस के लिए अपार श्रद्धा और आस्था का केंद्र रहा है।
समय के साथ-साथ बाबा नीम करौली महाराज के भक्तों की संख्या बढ़ी तो मंदिर के स्थापना दिवस ने महोत्सव का रूप ले लिया। कैंची धाम के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा यूं ही नहीं, बल्कि हकीकत यह है कि यहां सच्ची भक्ति और दिल से मांगी गई हर मुराद बाबा के आशीर्वाद से पूरी होती है।
शिप्रा नदी पर स्थित कैंची मंदिर के स्थापना के पीछे रोचक कथा है। महाराज के मन में उठी मौज ही उनका संकल्प बन जाती थी। ऐसी ही मौज में बाबा ने कैंची धाम की स्थापना की। बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1942 में कैंची निवासी पूर्णानंद तिवारी सवारी के अभाव में नैनीताल से गेठिया होते हुए पैदल ही कैंची की ओर वापस लौट रहे थे, तभी एक स्थूलकाय व्यक्ति कंबल लपेटे हुए नजर आया तो पूर्णानंद डर गए।
उस व्यक्ति ने पूर्णानंद को उनका नाम लेकर पुकारा और इस समय उनके वहां पहुंचने का कारण भी बता दिया। यह कोई और नहीं बल्कि स्वयं बाबा नीम करौली महाराज थे। बाबा ने पूर्णानंद से कुछ और बातचीत की और निडर होकर आगे बढ़ने को कहा। तब पूर्णानंद ने बाबा से पूछा कि अब कब उनके दर्शन होंगे तो बाबा ने तपाक से जवाब दिया कि 20 साल बाद। यह कहकर बाबा ओझल हो गए।
वर्तमान में इस स्थान पर है हनुमान जी का मंदिर
ठीक 20 साल बाद बाबा नीम करौली महाराज तुलाराम साह और श्री सिद्धि मां के साथ रानीखेत से नैनीताल जा रहे थे, तभी बाबा जी कैंची में उतर गए और कुछ देर तक पैराफिट में बैठे रहे वहीं उन्होंने पुरानी याद ताजा की और वह स्थान देखने की इच्छा जताई जहां साधु प्रेमी बाबा और सोमवारी महाराज ने वास किया था।
24 मई 1962 को बाबा के पावन चरण उस भूमि में रखे जहां वर्तमान में कैंची मंदिर स्थित है। इस तरह बीस साल पुरानी मनसा शक्ति ने कैंची धाम की स्थापना की। तब बाबा ने कैंची धाम में उस समय घास और जंगल के बीच घिरे चबूतरे और हवन कुंड को ढकने को कहा।
(यह वही चबूतरा है जहां सोमवारी बाबा ने वास किया था) वर्तमान में इस स्थान पर हनुमान जी का मंदिर है। इसी में सोमवारी बाबा की धूनी के अवशेष आज भी सुरक्षित हैं। 15 जून 1964 को मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की प्रतिष्ठा की गई और तभी से 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस के रूप में मनाया जाता है।
आज से बनाए जाएंगे मालपुए
15 जून को लगने वाले कैंची धाम में मेले की तैयारियां जोरशोर से चल रही हैं 12 जून से मंदिर में प्रसाद के रूप में बांटे जाने वाले मालपुए बनाने का काम शुरू हो जाएगा। इस दौरान अनवरत हनुमान चालीसा का पाठ होगा। गुरुवार को मेला प्रभारी कोतवाल हरीश पांडा ने मेला स्थल में पार्किंग स्थलों का जायजा लिया। 14 जून को मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।