साढ़े छह दशक तक सियासत में चमके, लेकिन हैदराबाद में लगे इस 'ग्रहण’ से उबर नहीं पाए एनडी
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देश की सियासत में साढ़े छह दशक तक चमकते रहे एनडी तिवारी राजभवन हैदराबाद में लगे एक ‘ग्रहण’ से अंत तक उबर नहीं पाए।
राजभवन में रहने के दौरान एक सीडी सामने आई, जिसे सैक्स स्कैंडल करार दिया गया । शायद इसी ग्रहण के चलते कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें आगे कोई तव्वजो भी नहीं दी। नतीजा यह रहा कि एनडी को अपना अंतिम समय सियासी तौर पर अकेले ही गुजारना पड़ा।
नेहरू और इंदिरा के बेहद नजदीक रहे एनडी लंबे समय तक उत्तर प्रदेश और देश की सियासत में अपनी चमक बिखेरते रहे। 2007 में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के तौर पर पांच साल की पारी पूरी करने के बाद लगा था कि कांग्रेस एक बार फिर से उन्हें केंद्र की राजनीति में सक्रिय करेगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एनडी को आंध्र प्रदेश का राज्यपाल नियुक्त कर दिया। जनता के नजदीक रहने वाले एनडी का यह मोह हैदराबाद राजभवन में भी नहीं छूटा।
एनडी ने राजभवन में ही अपना दरबार लगाना शुरू कर दिया। कहा तो यहां तक जाता है कि आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाई राजशेखर रेड्डी को यह रास नहीं आया और उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से अपनी नाराजगी जाहिर भी की थी। लेकिन एनडी अपने अंदाज में काम करते रहे।
उस वक्त यह भी कहा जाने लगा था कि भले ही एनडी प्रधानमंत्री नहीं बन पाए। लेकिन कांग्रेस उनकी सेवाओं के एवज में देश के सर्वोच्च संवैधानिक राष्ट्रपति पद पर उनकी ताजपोशी कर सकती है। इस दिशा में कोई काम आगे बढ़ता उससे पहले ही एनडी के सियासी करियर पर एक ग्रहण लग गया। उसी वक्त एक वीडियो वायरल हो गया।
हैदराबाद राजभवन में ही कथित रुप से बनाए गए इस वीडियो वाली सीडी ने देश की सियासत में भूचाल सा ला दिया। इस सीडी को लेकर एनडी का जमकर मीडिया ट्रायल हुआ। इसे सैक्स स्कैंडल करार दिया गया।
सीडी वायरल होने के बाद एनडी ने राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया और सीधे देहरादून लौट आए। इसके बाद से ही एनडी का सियासी करियर अस्ताचंल की ओर चल पड़ा। हालात यहां तक बने कि एफआईआई देहरादून के बंगले में रहने वाले एनडी से उत्तराखंड के उन कांग्रेसी नेताओं ने भी दूरी बना ली,जो उन्हीं की दम पर अपना एक सियासी मुकाम बना सके थे।
फिर से सार्वजनिक जीवन में लौटने की कोशिश की
कुछ माह गुमनामी की जिंदगी जीने के बाद एनडी ने एक बार फिर से सार्वजनिक जीवन में लौटने की कोशिश की। उन्होंने निरंतर विकास समिति नाम से गैर राजनीतिक मंच बनाया। एनडी की यह मुहिम आगे बढ़ती उससे पहले ही उनके जीवन में उनकी पत्नी उज्जवला और जैविक पुत्र रोहित शेखर ने अदालती आदेश से प्रवेश किया।
उस समय तक उत्तराखंड की सत्ता पर कांग्रेस एक बार फिर से काबिज हो चुकी थी। लेकिन राज्य सरकार ने नारायण दत्त तिवारी की कोई सुध नहीं ली। इस पर एनडी तिवारी अपने पुराने समाजवादी शिष्य मुलायम सिंह यादव के पास लखनऊ चले गए। यूपी में समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार के मुखिया अखिलेश यादव ने उन्हें पूरा सम्मान दिया। लेकिन एनडी सियासी और शारीरिक रूप से लगातार कमजोर होते गए।