कांग्रेस में हलचल पैदा कर सकता है तिवारी का 'सपूत'
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी का सच स्वीकार करना उत्तराखंड में कांग्रेस की सियासत में हलचल पैदा कर सकता है।
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29 मई को एफआरआई स्थित आवास में ब्लड सैंपल देते समय तिवारी ने कहा था कि ब्लड सैंपल इसलिए दिया कि सच सामने आ जाए।
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डीएनए टेस्ट से सच सामने आ भी गया था पर तिवारी को सच स्वीकार करने में समय लगा।
समृद्ध राजनीति को अपने में समेटे हुए हैं तिवारी
हाल ही में तिवारी ने नैनीताल का दौरा करने का इरादा भी जताया था पर अब रोहित को बेटा मान लेने के बाद यह साफ नहीं है कि तिवारी नैनीताल की ओर रुख भी करेंगे या नहीं।
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तिवारी समृद्ध राजनीति को भी अपने में समेटे हुए हैं। उत्तराखंड में 2012 के विधानसभा चुनाव में तिवारी कुमाऊं भी पहुंचे भी थे।
चुनाव लड़ने का इरादा जता रहे हैं रोहित
अब रोहित भी चुनाव लड़ने का इरादा जता रहे हैं। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि तिवारी अगर उत्तराखंड की ओर रुख भी करते हैं तो उनके समर्थक शायद ही उनसे गिला शिकवा करें।
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पर चुनाव प्रचार में तिवारी की भूमिका क्या होगी यह अभी साफ नहीं है। तिवारी के समर्थक फिलहाल इस मामले को लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
राजनीतिक योगदान की उपेक्षा नहीं
एक कांग्रेसी नेता के मुताबिक तिवारी राजनीति में सक्रिय नही हैं। लिहाजा उनके राजनीतिक योगदान की उपेक्षा नहीं की जानी चाहिए।
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रोहित के मामले में अधिक तर समर्थक डीएनए टेस्ट के बाद से सच को स्वीकार कर चुके थे, हालांकि खुद तिवारी इस सच को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे।