दुनिया में चमक बिखेर रहे उत्तराखंड के क्रिकेट खिलाड़ी, लेकिन ‘पलायन’को मजबूर
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भारत के सबसे पसंदीदा खेल क्रिकेट में उत्तराखंड के हाथ आज भी खाली हैं। राज्य गठन के 17 साल बीतने के बावजूद राज्य में क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता नहीं मिल सकी है, जिसके चलते प्रतिभाएं ‘पलायन’ करने को मजबूर हैं।
मौजूदा समय में राज्य के आधा दर्जन से अधिक खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चमक बिखेर रहे हैं, जो अन्य किसी राज्य की टीम का हिस्सा हैं। उत्तराखंड के कई क्रिकेटर मौजूदा वक्त में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल रहे हैं।
इनमें प्रमुख तौर पर मनीष पांडे, उन्मुक्त चंद, पवन नेगी, ऋषभ पंत, एकता बिष्ट व मानसी जोशी का नाम लिया जा सकता है। इसके अलावा कई अन्य खिलाड़ी हैं, जो राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। यह सभी खिलाड़ी दूसरे राज्यों की टीमों से खेलने को मजबूर हैं। इनमें प्रमुख तौर पर दून निवासी आर्यन शर्मा (अंडर-16 सेंट्रल जोन के कप्तान), हिमांशु असनोड़ा (यूपी), अभिमन्यु ईश्वरन (पश्चिम बंगाल), पवन सुयाल व राबिन बिष्ट (राजस्थान), स्नेह राणा (रेलवे), सिद्धार्थ (हिमाचल), तनुष (गुजरात) और श्वेता वर्मा (यूपी) का नाम लिया जा सकता है।
बनी थी तदर्थ कमेटी
वर्ष 2015 में अनुराग ठाकुर के बीसीसीआई अध्यक्ष रहने के दौरान राज्य में एक तदर्थ कमेटी गठित की गई थी, जो युवा प्रतिभाओं की बेहतरी के लिए बनी। एमपी पंडोव की अध्यक्षता में गठित समिति को राज्य में मान्यता की रुकावटों को दूर करने और सभी एसोसिएशन के बीच आम सहमति बनाने की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
सकारात्मक संकेत भी मिले
राज्य में क्रिकेट एसोसिएशन की मान्यता को लेकर कई बार सकारात्मक संदेश भी मिले हैं, हालांकि कवायद पर बार-बार ब्रेक भी लग जाता है। राज्य गठन के बाद राज्य में प्रमुख तौर पर छह एसोसिएशन ने काम किया था। हालांकि बीसीसीआई के सामने जब उन्होंने अपना प्रजेंटेशन दिया तो केवल दो को ही चुना गया। इस वर्ष यूपीसीए की बैठक के लिए दून पहुंचे आईपीएल चेयरमैन राजीव शुक्ला ने भी मान्यता के विवाद खत्म होने का दावा किया था।
राज्य की क्रिकेट एसोसिएशन को मान्यता दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। हम हर स्तर पर बातचीत कर रहे हैं ताकि राज्य की एसोसिएशन को जल्द से जल्द मान्यता मिले और प्रदेश के खिलाड़ियों को दूसरी जगह से खेलने के लिए मजबूर न होना पड़े।
- अरविंद पांडे, खेल मंत्री